
धर्मावाला टोल प्लाजा से उपजी समस्या: ग्रामीण सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक से स्थानीय निवासियों का विरोध
देहरादून, 18 जनवरी (संवाददाता): उत्तराखंड के देहरादून जिले की विकास नगर तहसील में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित धर्मावाला टोल प्लाजा की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में एक गंभीर समस्या सामने आई है।
टोल टैक्स से बचने के लिए वाहन चालक ग्रामीण सड़कों (लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के अधीन) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष फैल रहा है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीण कारों, ट्रकों और डंपरों जैसे वाहनों को इन सड़कों पर चलने से रोकने की मांग कर रहे हैं।
वीडियो में ग्रामीण एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराते दिख रहे हैं। उनका मुख्य कहना है कि ये ग्रामीण रोड भारी या तेज ट्रैफिक के लिए बनी नहीं हैं। ट्रक और डंपर जैसे ओवरलोडेड भारी वाहनों से सड़कें टूट रही हैं, जबकि कारों और अन्य छोटे चार-पहिया वाहनों (जैसे SUV) की तेज रफ्तार से ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों, बूढ़ों और बुजुर्गों पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। एक स्थानीय निवासी ने वीडियो में कहा, "ट्रक-डंपर तो बिल्कुल नहीं चलने चाहिए, लेकिन कारें भी इतनी तेज चल रही हैं कि कब क्या हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। बच्चे और बुजुर्ग सड़क पार करते समय डरते हैं।"
ग्रामीणों की मांग है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की फोर-लेन सड़क पर ही सभी वाहनों को निर्देशित किया जाए, ताकि उनकी सड़कों पर अनियंत्रित ट्रैफिक न आए। वीडियो में फोकस बड़े वाहनों पर रोक के साथ-साथ छोटे वाहनों की तेज गति और सुरक्षा जोखिम पर भी है।
स्थानीय लोग चिंतित हैं कि तेज रफ्तार वाली कारें ग्रामीण इलाकों में दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती हैं, खासकर जहां बच्चे खेलते हैं या बुजुर्ग चलते-फिरते हैं।
धर्मावाला टोल प्लाजा इस समस्या की मुख्य वजह बताया जा रहा है, क्योंकि टोल शुल्क से बचने के लिए चालक वैकल्पिक ग्रामीण रास्तों का सहारा ले रहे हैं। इससे सड़कों की क्षति के अलावा सुरक्षा का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस पूरे मामले पर ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और स्थानीय पुलिस विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
एनएचएआई को टोल प्लाजा के आसपास वैकल्पिक रास्तों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए, पीडब्ल्यूडी को ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित करना चाहिए, जबकि आरटीओ और पुलिस को ओवरलोड वाहनों की जांच तथा स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन कराना चाहिए। यदि ये विभाग तत्काल बैरिकेडिंग, चेकिंग पॉइंट या स्पीड कैमरा जैसे कदम नहीं उठाते, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
अभी तक स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वायरल वीडियो के बाद मुद्दा सुर्खियों में है। ग्रामीणों की मांग है कि जितनी जल्दी कार्रवाई हो, उतना ग्रामीणों और यात्रियों दोनों के हित में होगा। यह घटना टोल प्लाजा जैसी सुविधाओं के साथ वैकल्पिक रास्तों पर अनियोजित ट्रैफिक के दुष्परिणामों को उजागर करती है। आगे की जांच और समाधान की प्रतीक्षा है।