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सरसींवा उपार्जन केंद्र में 376 बोरी अवैध धान जप्त, तहसीलदार आयुष तिवारी की कार्यवावाही!

भाजपा जिला अध्यक्ष (ओबीसी वर्ग) झाड़ू राम साहू की भूमिका पर गंभीर सवाल!

सरसींवा(सारंगढ़-बिलाईगढ़)/गोपी अजय:- सूत्रों से मिले जानकारी अनुसार सरसींवा धान उपार्जन केंद्र में 376 बोरी अवैध धान की जप्ती की गई है। यह अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह मामला सीधे-सीधे जिम्मेदारी, नैतिकता और राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। शनिवार दिनांक 17 जनवरी को भौतिक सत्यापन के दौरान तहसीलदार आयुष तिवारी द्वारा अतिरिक्त धान पकड़ा जाना इस बात का संकेत है कि यदि जांच न होती तो यह अवैध स्टॉक किस रास्ते से और किसके संरक्षण में बाहर चला जाता इसका जवाब आज भी धुंधला है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि इस उपार्जन केंद्र में अध्यक्ष पद पर भाजपा के जिला स्तर के नेता झाड़ू राम साहू पदस्थ हैं। अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी यदि धान उपार्जन केंद्र में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो यह महज संयोग नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या संभावित संलिप्तता की ओर इशारा करता है। सवाल यह है कि जब अध्यक्ष मौजूद हैं तो फिर 376 बोरी धान स्टॉक से बाहर कैसे पहुंच गया? क्या यह सब उनकी जानकारी के बिना संभव था?
क्षेत्र के अधिकांश धान उपार्जन केंद्र किसानों से तय 40.700 किलोग्राम के बजाय 41.300–41.500 किलोग्राम धान लिया जाना, फिर “सूखता” का बहाना बनाकर कागजों में खेल करना और अंत में मंडी परिसर में अतिरिक्त धान का मिलना—यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि किसानों की मेहनत और शासन के खजाने, दोनों की कीमत पर खेल खेला जा रहा है। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका पर उंगली उठना स्वाभाविक है। आलोचना इसलिए और तीखी हो जाती है क्योंकि कुछ समय पहले इन्हीं झाड़ू राम साहू से जुड़ी उप मंडी झुमका में भी किसानों से निर्धारित मात्रा से अधिक धान लेने का मामला सामने आ चुका है और उसका समाचार प्रकाशन भी हुआ था। इसके बावजूद यदि फिर से उसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि या तो सबक नहीं लिया गया या फिर सब कुछ जानते हुए भी नजरअंदाज किया गया।
यह स्थिति भाजपा पार्टी की छवि पर भी सीधा आघात करती है। पार्टी जिन लोगों को उपार्जन केंद्रों का अध्यक्ष बनाकर जिम्मेदारी सौंपती है, यदि उन्हीं के कार्यकाल में इस तरह के मामले उजागर हों, तो आम जनता के बीच यह संदेश जाता है कि पार्टी के नाम का इस्तेमाल कर व्यवस्था को लूटा जा रहा है। यह तंज नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत से उपजा सवाल है कि क्या ऐसे लोग पार्टी की साख मजबूत कर रहे हैं या फिर उसे नुकसान पहुंचा रहे हैं। केंद्र के प्रबंधक मोतीलाल प्रधान द्वारा भी अतिरिक्त धान पाए जाने की पुष्टि के बाद यह तर्क और कमजोर हो जाता है कि सब कुछ अनजाने में हुआ होगा। इतने बड़े स्तर पर धान का अतिरिक्त होना बिना स्थानीय नेतृत्व और अध्यक्ष की भूमिका के संभव नहीं लगता। इसलिए यह आशंका गहराती जा रही है कि इस पूरे मामले में अध्यक्ष की भूमिका की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। अब यह मामला केवल 376 बोरी धान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग वास्तव में किसानों और शासन के हितों की रक्षा कर रहे हैं, या फिर चुप्पी और संरक्षण के जरिए भ्रष्टाचार को पनाह दे रहे हैं। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि दोषियों के लिए कुर्सी और पार्टी का नाम ढाल बन चुका है।
प्रशासन ज़ब ज़ब छपा मार धान जप्ती की है या किसी भी प्रकार की कार्यवाही की है तो प्रेस विज्ञप्ति दिया जाता था परन्तु सरसींवा उपवार्जन केंद्र मे किये कार्यवाही को लेकर किसी प्रकार की प्रशासनिक जानकारी नहीं दी गई। ऐसा क्यों?

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