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#बाराबंकी के सरकारी स्कूल में महिला टीचर ने जान दी

#बाराबंकी के सरकारी स्कूल में महिला टीचर ने जान दी:ऑफिस में फंदा लगाया, पति बोले- प्रिंसिपल और स्टाफ परेशान कर रहा था।
17 जनवरी 2026
बाराबंकी

बाराबंकी के एक सरकारी स्कूल में शनिवार को महिला टीचर का शव मिला। प्रिंसिपल के ऑफिस में फंदे पर शव लटक रहा था।
सुबह पति उनको स्कूल छोड़कर गए थे। क्लास में बैग रखने के बाद वह हेडमास्टर के ऑफिस में गई थीं। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर ऑफिस में स्टाफ ने झांककर देखा तो वे फंदे से लटक रही थीं।

घटना सतरिख थानाक्षेत्र के उधवापुर स्थित कंपोजिट विद्यालय की है। महिला टीचर के पति ने प्रिंसिपल पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। जिसके चलते पत्नी ने फंदा लगाकर जान दी है।

अब समझिए पूरा मामला

बाराबंकी शहर के जलालपुर मोहल्ले की निवासी उमा वर्मा उर्फ माला ( 40) उधवापुर के स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। उनके पति ऋषि भी टीचर हैं। उनकी तैनाती सिद्धौर ब्लॉक के स्कूल में है। परिवार में दो बच्चे हैं।

सहकर्मी शिक्षकों के अनुसार, उमा वर्मा शुक्रवार सुबह उमा के पति ऋषि उन्हें विद्यालय छोड़कर अपने स्कूल चले गए थे। विद्यालय पहुंचने के बाद उमा अपनी कक्षा में सामान रखकर प्रिंसिपल के ऑफिस में चली गईं। काफी समय तक उनके बाहर न आने पर सहकर्मियों ने आवाज लगाई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इसके बाद दरवाजा खोलने पर उनका शव रस्सी के सहारे फंदे से लटका हुआ पाया गया। दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। मामले की सूचना पर सतरिख थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

पति बोले- पढ़ाने पर टिप्पणी करता था स्टाफ

सूचना पर शिक्षिका के टीचर पति ऋषि वर्मा स्कूल पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ साल से स्कूल की प्रिंसिपल प्रताड़ित कर रही थीं। जब वह मन लगाकर बच्चों को पढ़ाती थीं तो स्टाफ के लोग टीका-टिप्पणी करते थे। कई बार पूरे स्टाफ ने मिलकर उनके खिलाफ शिकायतें कीं। हम ट्रांसफर के लिए प्रयास कर रहे थे लेकिन ट्रांसफर नहीं हो पाया।

किसी ने उन्हें उतारकर अस्पताल नहीं पहुंचाया

पति ने आरोप लगाया कि सभी शिक्षकों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा लेकिन किसी ने उन्हें उतारकर समय पर इलाज के लिए नहीं भिजवाया। शायद वो बच जातीं। सुबह 10:30 बजे मुझसे बात हुई थी लेकिन न परेशान दिख रही थीं और न ही मुझे कोई बात महसूस हुई।

भाई बोला- स्टाफ ने कमरे का सामान ठीक किया, फिर पुलिस बुलाई

टीचर के भाई शिवाकांत वर्मा ने बताया - मेरी बहन मन लगाकर बच्चों को पढ़ाती थीं। इस बात को लेकर पूरा स्टाफ टीका-टिप्पणी करता था। कहते थे इनका अवॉर्ड चाहिए। एक-दो बार हमने उन्हें परेशान देखा तो पूछा लेकिन वह टाल देती थीं। सहायक अध्यापक सुशील वर्मा और इंचार्ज सीतावती, जया और अर्चना ने उन्हें परेशान किया। जिस प्रधानाध्यापक के कमरे में फांसी लगाई उसका दरवाजा अंदर से लॉक नहीं था खुला था। पहले स्टाफ ने वहां की सभी चीजों को ठीक किया। उसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक ने बताया-

"घटना अत्यंत दुखद है। इस पूरे मामले में पुलिस जांच कर रही है। यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनको प्रताड़ित करने की कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई।"

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