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रील और मोबाइल की लत से पारिवारिक रिश्तों पर असर, बच्चो में भी तनाव,बढ़ती चिंता।


[संवाददाता]
योगेंद्र सिंह जादौन(फौजी)
सबलगढ़:
मोबाइल और सोशल मीडिया रील्स का बढ़ता चलन अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण महिलाओं के पारिवारिक रिश्तों में तनाव और दूरियाँ बढ़ी हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों के अनुसार, कई घरों में महिलाएँ खाली समय में रील देखने या बनाने में अधिक समय बिताने लगी हैं। इसके चलते बच्चों की देखभाल, आपसी संवाद और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई परिवारों में पति-पत्नी के बीच संवाद की कमी, आपसी अविश्वास और मनमुटाव की स्थिति बन रही है।
परामर्शदाताओं का कहना है कि लगातार मोबाइल पर समय बिताने से व्यक्ति वास्तविक रिश्तों से कटने लगता है। रील्स से मिलने वाली तात्कालिक खुशी धीरे-धीरे आदत बन जाती है, जो परिवार के लिए समय निकालने में बाधा बनती है।
महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संस्थाओं ने इस मुद्दे पर संतुलन बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन उसका सीमित और समझदारी से प्रयोग जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार में संवाद बढ़ाकर, मोबाइल उपयोग की सीमा तय कर और साथ समय बिताकर इस समस्या से बचा जा सकता है। समाज में बढ़ती इस प्रवृत्ति को देखते हुए जागरूकता फैलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि तकनीक रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बने, तोड़ने का नही।

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