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*चंडीगढ़ में गोवंश हत्याकांड की आशंका, सड़कों पर मिले कंकाल — महंत मनोज शर्मा का बड़ा आरोप, बोले: “प्रशासनिक मिलीभगत बिना यह संभव नहीं*

चंडीगढ़। शहर में गोवंश से जुड़े सनसनीखेज मामलों ने प्रशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्व हिंदू परिषद, चंडीगढ़ (पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने इस गंभीर विषय को लेकर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं माननीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है।
महंत मनोज शर्मा ने पत्र में उल्लेख किया है कि चंडीगढ़ गोशाला में भारी संख्या में गोवंश का मृत पाया जाना, कुछ गोवंश के अवशेषों का रहस्यमय रूप से गायब होना, और इसके ठीक अगले दिन 15 जनवरी 2026 को बापूधाम, शास्त्री नगर और मनीमाजरा जैसे अलग-अलग पुलिस थाना क्षेत्रों से गले-सड़े कंकाल, कटे हुए अंग और मृत गोवंश का मिलना यह स्पष्ट संकेत देता है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संगठित अपराध और संभावित प्रशासनिक संरक्षण का हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह संभव ही नहीं है कि तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक ही दिन में ऐसी घटनाएं हों और प्रशासन को इसकी भनक तक न लगे। महंत मनोज शर्मा ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में जब-जब गोमांस या गोवंश से जुड़े अवैध मामले सामने आए, जांच को जानबूझकर कमजोर किया गया और दोषियों को बचाने का प्रयास हुआ।
पत्र में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि चंडीगढ़ में प्रशासन की जानकारी के बिना गोमाता, भैंस और बकरी के दूध का अवैध व्यापार लंबे समय से फल-फूल रहा है, जो गोवंश की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे सभी लोगों और नेटवर्क के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
महंत मनोज शर्मा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि—
पूरे मामले की CBI अथवा किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए
एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए
समिति में उन्हें भी शामिल किया जाए, ताकि जमीनी सच्चाई सामने आ सके
दोषी अधिकारियों और अपराधियों पर उदाहरणात्मक कार्रवाई हो
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोवंश के अधिकार और संरक्षण को लेकर वे पहले भी कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब मामला राष्ट्रीय स्तर की गंभीरता का रूप ले चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल चंडीगढ़ बल्कि देशभर में गोवंश सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के राज पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस सनसनीखेज आरोपों पर कितनी शीघ्र और कितनी कठोर कार्रवाई करती है।

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