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*लोहण्डीगुड़ा में भव्य रूप से प्रारम्भ हुआ “बस्तर पण्डुम”, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का सशक्त मंच*


//जगदलपुर//
लोहण्डीगुड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत धाराऊर (आम बगीचा) में आज बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं एवं लोक विरासत को समर्पित भव्य आयोजन “बस्तर पण्डुम” का गरिमामय शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद महेश कश्यप एवं विधायक विनायक गोयल की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं पूजा-अर्चना के साथ किया गया, जिसने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने कहा कि “बस्तर की संस्कृति हमारी पहचान है और जब तक संस्कृति बचेगी, तब तक हमारी पहचान भी सुरक्षित रहेगी।” बस्तर पण्डुम जैसे आयोजन आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपराओं को सहेजने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहाँ की लोककलाएँ, नृत्य, संगीत, वेशभूषा और जीवनशैली पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती हैं। बस्तर पण्डुम जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।

विधायक विनायक गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर पण्डुम आदिवासी समाज की आत्मा से जुड़ा उत्सव है। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं, लोक विश्वासों और सामुदायिक एकता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि वे अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकें और उसे आगे बढ़ा सकें।

कार्यक्रम के दौरान बस्तर की विविध जनजातियों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। मांदर, ढोल, तुड़ी और बांसुरी की मधुर धुनों पर कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से बस्तर की गौरवशाली परंपराओं को प्रदर्शित किया।

बस्तर पण्डुम में पारंपरिक व्यंजनों, हस्तशिल्प, लोककला एवं जनजातीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहाँ स्थानीय कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया। इससे न केवल स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को मंच मिला, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला।

यह उत्सव विशेष रूप से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, पारंपरिक मूल्यों को सहेजने और आदिवासी विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप जी, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल जी, पूर्व विधायक लच्छुराम कश्यप जी, सांसद प्रतिनिधि आनंद मोहन मिश्रा जी, जनपद अध्यक्ष पदमा कश्यप जी, उपाध्यक्ष बसंत कश्यप जी, मण्डल अध्यक्ष मंगतुराम कश्यप जी, जनपद सदस्य तनुजा ठाकुर जी, मनीष पोयाम जी, दशमी कश्यप जी, जिला मंत्री रैतुराम बघेल जी, चन्द्रशेखर ठाकुर जी, सावेन्द्र सेठिया जी, बुटकी कश्यप जी, नरेश खापडे जी, भरत कश्यप जी, एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।


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