मुंबई में ठाकरे बंधू की हार
ठाकरे बंधुओं की हार के कारण – समाचार विश्लेषणमहाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) को हाल के चुनावों/राजनीतिक घटनाक्रमों में जो झटका लगा, उसके पीछे कई मुख्य कारण माने जा रहे हैं:1️⃣ पार्टी में फूट और नेतृत्व संकट • शिवसेना का दो फाड़ होना (उद्धव ठाकरे बनाम एकनाथ शिंदे गुट) सबसे बड़ा कारण रहा। • पार्टी का पारंपरिक “धनुष-बाण” चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक ढांचा हाथ से निकल गया।2️⃣ मतदाताओं में भ्रम • शिवसेना नाम और विचारधारा को लेकर आम वोटर कन्फ्यूज हुआ। • किसे “असली शिवसेना” माना जाए, यह स्पष्ट नहीं हो पाया।3️⃣ गठबंधन राजनीति का नुकसान • महाविकास आघाड़ी (MVA) में रहते हुए हिंदुत्व बनाम सेक्युलर छवि को लेकर असमंजस। • कोर शिवसेना वोटर का एक हिस्सा नाराज़ हुआ।4️⃣ जमीनी संगठन कमजोर होना • कार्यकर्ताओं का पलायन दूसरे गुटों/पार्टियों में हुआ। • बूथ लेवल मैनेजमेंट कमजोर पड़ा।5️⃣ राज ठाकरे (MNS) का सीमित प्रभाव • तेज भाषणों और मुद्दों के बावजूद सीटों में तब्दील नहीं हो पाया वोट। • मराठी मुद्दा अब पहले जितना चुनावी असर नहीं दिखा सका।6️⃣ विरोधियों की मजबूत रणनीति • भाजपा और शिंदे गुट की संगठित चुनावी मशीनरी। • संसाधन, सत्ता और प्रशासनिक पकड़ का फायदा।7️⃣ बदलता राजनीतिक माहौल • महाराष्ट्र की राजनीति अब स्थिर नेतृत्व और विकास एजेंडा की ओर झुकती दिखी। • भावनात्मक राजनीति का असर पहले से कम हुआ।