
AIMIM की जीत पर सियासी हलचल, शिंदे गुट में “पेट दर्द” जैसी बेचैनी!
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में AIMIM की अप्रत्याशित सफलता के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 29 महानगर पालिकाओं में AIMIM के 125 से अधिक उम्मीदवारों के जीतकर आने के बाद अब सत्ताधारी खेमे से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बयान चर्चा में है।
एकनाथ शिंदे ने AIMIM की बढ़ती ताकत पर चिंता जताते हुए कहा कि “इतनी बड़ी संख्या में AIMIM उम्मीदवारों का जीतकर आना देश के लिए खतरा हो सकता है, इस पर चिंतन करने की जरूरत है।”
शिंदे के इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AIMIM की जीत से कुछ दलों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है, मानो चुनावी नतीजों ने उनके “पेट में दर्द” पैदा कर दिया हो।
जीत पर सवाल, जनमत पर चुप्पी?
सवाल यह उठ रहा है कि जब जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से वोट देकर अपने प्रतिनिधि चुने हैं, तो फिर इस जीत को खतरा बताने की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है? AIMIM की सफलता पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वह यह दिखाती हैं कि कुछ राजनीतिक दल अल्पसंख्यक राजनीति के मजबूत होने से असहज हैं।
AIMIM की मजबूती से बढ़ी सियासी घबराहट
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान AIMIM की बढ़ती ज़मीनी पकड़ का असर है। स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता ने साफ कर दिया है कि AIMIM अब केवल सीमित इलाकों तक सिमटी पार्टी नहीं रही, बल्कि शहरी राजनीति में भी एक प्रभावी ताकत बनकर उभर रही है।
बयान से बढ़ सकता है सियासी टकराव
इस बयान के बाद AIMIM की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यह मुद्दा आने वाले समय में विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीति को भी प्रभावित करेगा।
कुल मिलाकर
AIMIM की जीत जहां उसके समर्थकों के लिए उत्साह का कारण है, वहीं सत्ताधारी खेमे की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि कुछ नेताओं को यह नतीजा रास नहीं आ रहा। राजनीतिक हलकों में इसे साफ तौर पर घबराहट और असहजता के तौर पर देखा जा रहा है।