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ग्रामीण भारत में युगांतकारी परिवर्तन विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण गारंटी अधिनियम 2025


जैसलमेर।(सी आर देवपाल म्याजलार)।
यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण गारंटी अधिनियम 2025 वीबी-जी रामजी इसी सोच का सशक्त प्रतिबिंब है। यह कानून केवल एक नई योजना नहीं बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति में एक गुणात्मक और संरचनात्मक परिवर्तन है।मनरेगा अपने समय में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था लेकिन समय के साथ इसकी कई मौलिक कमियां सामने आईं। अधिकांश कार्य स्थानीय विकास योजनाओं से जुड़े बिना बिखरे हुए रूप में कराए गए जिनसे दीर्घकालिक आर्थिक या सामाजिक लाभ नहीं मिल पाया। अस्थायी सड़कें अधूरी जल संरचनाएं और बिना ठोस योजना के मिट्टी कार्य-ये सब जनता के पैसे के प्रभावी उपयोग पर प्रश्नचिह्न लगाते रहे। साथ ही कमजोर निगरानी व्यवस्था के कारण फर्जी जॉब कार्ड नकली लाभार्थी मनगढ़ंत हाजिरी और मजदूरी भुगतान में अनियमितताएं आम हो गईं। सोशल ऑडिट जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था भी प्रभावी नहीं हो पाई। प्रशासनिक व्यय की सीमित अनुमति खेती के मुख्य मौसम में काम चलने से किसानों को मजदूर न मिलना और बेरोजगारी भत्ते व मुआवजे के प्रावधानों का कागजों तक सीमित रहना-ये सभी समस्याएं सुधार की मांग कर रही थीं।वीबी-जी रामजी अधिनियम 2025 इन्हीं चुनौतियों का व्यावहारिक और दूरदर्शी समाधान प्रस्तुत करता है। नए कानून में वार्षिक रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। खेती के बुवाई और कटाई काल में श्रमिकों की कमी न हो इसके लिए राज्य सरकारों को 60 दिनों के कार्य विराम की शक्ति दी गई है जिससे किसान और श्रमिक-दोनों के हितों में संतुलन स्थापित होगा।यह अधिनियम अब केवल काम देने तक सीमित नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण और आवश्यक कार्यों पर केंद्रित है। जल संरक्षण ग्रामीण बुनियादी ढांचा आजीविका अवसंरचना और आपदा प्रबंधन जैसे ठोस कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। पीएम गतिशक्ति से जुड़ाव के कारण गांवों में वही काम होंगे जिनकी वास्तव में जरूरत है-जैसे स्थायी सड़कें और जल संरचनाएं।तकनीक आधारित पारदर्शिता इस कानून की सबसे बड़ी ताकत है। जियो-टैगिंग सैटेलाइट इमेजरी मोबाइल ऐप और एआई के उपयोग से कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी होगी। हर छह महीने में डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही एक डिजिटल बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली और जिला लोकपालों की व्यवस्था से जवाबदेही सुनिश्चित होगी।मजदूरों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए साप्ताहिक वेतन भुगतान को अनिवार्य किया गया है। दो सप्ताह से अधिक देरी होने पर स्वत मुआवजा मिलेगा। प्रशासनिक व्यय की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत करने से जमीनी स्तर पर पर्याप्त स्टाफ तकनीकी विशेषज्ञता प्रशिक्षण और निगरानी क्षमता विकसित होगी।वित्तीय दृष्टि से भी यह अधिनियम अधिक टिकाऊ और जिम्मेदार है। अब हर वर्ष के लिए स्पष्ट और तय बजट होगा जिससे योजना बेहतर तरीके से लागू हो सकेगी। राज्यों को कुल आवंटन में वृद्धि के माध्यम से मनरेगा औसत की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। 40 प्रतिशत राज्य भागीदारी के साथ यह एक सशक्त सहकारी संघवाद मॉडल को आगे बढ़ाता है-ठीक उसी तरह जैसे स्वास्थ्य मिशन जैसी सफल योजनाएं।कुल मिलाकर वीबी-जी रामजी अधिनियम 2025 ग्रामीण भारत को सुनिश्चित आजीविका सुरक्षा टिकाऊ संपत्तियां भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं से जुड़ा रोजगार प्रदान करता है। यह कानून ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत के रोडमैप से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा और राजस्थान सहित पूरे देश को इसका भरपूर लाभ मिलेगा। साथ ही यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार की मजबूत गारंटी और विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगा।

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