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उन्मत्त भैरव (Unmatta Bhairava)

👉यह चित्र उन्मत्त भैरव (Unmatta Bhairava) का है, जो भगवान शिव के अत्यंत उग्र और शक्तिशाली रूपों में से एक हैं। यह विशिष्ट मूर्ति नेपाल के काठमांडू में स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर परिसर के भीतर एक छोटे से मंदिर में स्थापित है।
इस मूर्ति और इसके इतिहास से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. पहचान और स्वरूप
उन्मत्त भैरव: 'उन्मत्त' शब्द का अर्थ है 'मस्त' या 'जो सांसारिक मोह-माया से परे आनंद में पागल हो'। भैरव के आठ प्रमुख रूपों (अष्ट भैरव) में से यह एक हैं।
प्रतीक: मूर्ति में उन्हें 'ऊर्ध्व लिंग' (Erect Phallus) के साथ दिखाया गया है। तंत्र शास्त्र में यह कामुकता का नहीं, बल्कि योगिक शक्ति और प्राण ऊर्जा को ऊपर की ओर प्रवाहित करने (ऊर्ध्वरेता) का प्रतीक माना जाता है। यह पूर्ण ब्रह्मचर्य और आत्म-नियंत्रण को दर्शाता है।
2. इतिहास और स्थान
यह मूर्ति पशुपतिनाथ मंदिर के दक्षिण भाग में स्थित है।
माना जाता है कि यह मूर्ति काफी प्राचीन है, हालांकि मंदिर का वर्तमान ढांचा समय-समय पर पुनर्निर्मित होता रहा है। नेपाल के मल्ल राजाओं के समय में भैरव के विभिन्न रूपों की पूजा बहुत लोकप्रिय हुई थी।
3. धार्मिक मान्यताएं
स्वास्थ्य और संतान: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो लोग गुप्त रोगों या संतान प्राप्ति की समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, वे यहाँ आकर विशेष पूजा अर्चना करते हैं।
तामसिक पूजा: प्राचीन समय में भैरव के इस रूप की पूजा तांत्रिक पद्धतियों से की जाती थी, जिसमें बलि प्रथा भी शामिल थी, हालांकि अब यह रूप काफी हद तक बदल चुका है।
4. कलात्मक विशेषता
मूर्ति का गहरा लाल रंग (सिंदूर और तेल के लेप के कारण) और उनके गले में मुंडों की माला (कपाल माला) उनके उग्र स्वभाव को प्रदर्शित करती है। उनके कई हाथ विभिन्न शस्त्रों को धारण किए हुए हैं, जो बुराई के विनाश का संकेत हैं।
क्या आप पशुपतिनाथ मंदिर के अन्य रहस्यमय स्थानों या भैरव के अन्य रूपों के बारे में जानना चाहेंगे?

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