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बुरहानपुर के ग्राम पंचायत एमागिर्द में अवैध अतिरिक्त कार्यालय बंद, सचिव निलंबित शिकायतकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह की शिकायत पर त्वरित करवाई ।

बुरहानपुर के ग्राम पंचायत एमागिर्द में अवैध अतिरिक्त कार्यालय बंद, सचिव निलंबित
शिकायतकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह की शिकायत पर त्वरित करवाई ।
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संवाददाता ✍️...
सादिक अख्तर
जिला बुरहानपुर, मध्यप्रदेश


बुरहानपुर ।जिले की ग्राम पंचायत एमागिर्द में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार और गैरकानूनी गतिविधियों का आज एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जनपद पंचायत बुरहानपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को शिकायतकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह ने मौके पर बुलवाकर सिंधी बस्ती बायपास रोड पर संचालित एक अवैध अतिरिक्त ग्राम पंचायत कार्यालय को बताया जिसे तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया है। इस कार्यालय में सरपंच अब्दुल शाहिद और सचिव फिरोज तडवी द्वारा विभिन्न भ्रष्टाचारपूर्ण कार्यों का संचालन किया जा रहा था, जिसकी शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह द्वारा की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान सभी फाइलें, दस्तावेज और कागजात जब्त कर लिए गए हैं, तथा पंचायत सचिव फिरोज तडवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा यह मामला ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों की घोर अवहेलना का एक स्पष्ट उदाहरण है। ग्राम पंचायत एमागिर्द का आधिकारिक सरकारी कार्यालय पहले से ग्राम लोधीपुरा में स्थापित है, जहां सभी सरकारी कार्यों का संचालन होना चाहिए। हालांकि, सरपंच अब्दुल शाहिद और सचिव फिरोज तडवी ने सिंधी बस्ती बायपास रोड पर एक अतिरिक्त कार्यालय स्थापित कर रखा था, जो पूरी तरह से गैरकानूनी था। सरकारी नियमों और प्रावधानों के अनुसार, किसी भी ग्राम पंचायत के लिए एक से अधिक कार्यालय स्थापित करने की कोई अनुमति नहीं है। इस अवैध कार्यालय में न केवल भ्रष्टाचारपूर्ण गतिविधियां चल रही थीं, बल्कि आधिकारिक सरकारी फाइलें और दस्तावेज भी यहां स्थानांतरित कर रखे गए थे, जो सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का गंभीर मामला है।

शिकायतकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह, जो पिछले कई दिनों से स्थानीय कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों से इस गैरकानूनी गतिविधि की सूचना प्राप्त कर रहे थे, ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने जनपद पंचायत बुरहानपुर के सीईओ को विस्तृत शिकायत दर्ज कराई और मौके पर जांच के लिए आमंत्रित किया। ठाकुर प्रियांक सिंह ने बताया कि यह अवैध कार्यालय ग्रामीण विकास योजनाओं, सरकारी अनुदानों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में हेराफेरी का केंद्र बन चुका था। ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार, यहां से विभिन्न अनियमितताएं हो रही थीं, जैसे कि फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार करना, सरकारी फंडों का दुरुपयोग, और अन्य गैरकानूनी सौदेबाजियां। इस तरह की गतिविधियां न केवल ग्राम पंचायत की विश्वसनीयता को क्षति पहुंचाती हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों के हक को भी छीनती हैं।

आज की कार्रवाई में जनपद सीईओ द्वारा मौके पर पहुंचकर पूरे परिसर की जांच की गई। अवैध कार्यालय में रखी गईं सभी फाइलें, रजिस्टर, कंप्यूटर डेटा और अन्य दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है, ताकि आगे की जांच में इनका उपयोग किया जा सके। सचिव फिरोज तडवी को उनके पद से तत्काल निलंबित कर दिया गया है, और सरपंच अब्दुल शाहिद के खिलाफ भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जनपद सीईओ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ग्रामीण प्रशासन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और इसकी जांच उच्च स्तर पर की जाएगी। संभावित रूप से, इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या अन्य जांच एजेंसियों को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

ठाकुर प्रियांक सिंह ने आगे बताया, "ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है, जो विकास को बाधित करता है जनपद सीईओ की त्वरित प्रतिक्रिया से न्याय की उम्मीद जगी है। यह सिर्फ एक शुरुआत है; आगे भी ऐसे मामलों पर नजर रखी जाएगी।" ठाकुर सिंह ने ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी अनियमितता की सूचना बिना डर के दें, ताकि प्रशासन को मजबूत किया जा सके।

यह घटना मध्य प्रदेश के ग्रामीण प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर करती है। राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी की आवश्यकता है। इस मामले की जांच से अन्य पंचायतों में भी सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

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