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जिसने खून से सिचा ,उसी ने अपने कलेजे के टुकड़े का क़त्ल किया।

**राजेश सोनी रीवा क्राइम**

कलेजे के टुकड़े का ही कर दिया कत्ल! भिंड से रूह कंपा देने वाली ऑनर किलिंग की खबर
मध्य प्रदेश के भिंड में एक पिता ने अपनी ही बेटी की हत्या कर दी।

Killing: भिंड में पिता ने की बेटी की हत्या, शादी के बाद दूसरे के साथ जाने पर था नाराज
​भिंड, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ "झूठी शान" की खातिर एक पिता ने अपनी ही बेटी के खून से अपने हाथ लाल कर लिए। गोहद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गाँव में हुई इस ऑनर किलिंग Killing ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पिता ने अपनी विवाहित बेटी की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि वह उसकी मर्जी के खिलाफ किसी और के साथ चली गई थी।
​क्या है पूरा मामला?
​मिली जानकारी के अनुसार, मृतका की शादी कुछ समय पहले परिजनों की मर्जी से हुई थी। लेकिन शादी के बाद वह अपने ससुराल में खुश नहीं थी और वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ अपनी मर्जी से चली गई थी। यह बात उसके पिता और परिवार के लिए "सम्मान" का मुद्दा बन गई थी।
​पिता इस बात से इतना आक्रोशित था कि उसने लोक-लाज और समाज के डर से अपनी ममता को किनारे रख दिया। जब बेटी वापस लौटी, तो पिता ने मौका पाकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पिता ने इसे सामान्य मौत दिखाने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस की तत्परता ने सच सामने ला दिया।
​पुलिस की कार्रवाई और खुलासा
​घटना की सूचना मिलते ही गोहद पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शुरुआती जांच में ही पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। जब परिजनों से कड़ी पूछताछ की गई, तो पिता टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
​पुलिस के अनुसार, आरोपी पिता ने बयान दिया कि बेटी के इस कदम से समाज में उसकी बहुत बदनामी हो रही थी, जिससे वह काफी तनाव और गुस्से में था। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
​समाज पर सवाल खड़ा करती ऑनर किलिंग
​भिंड-मुरैना जैसे क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। शिक्षा और आधुनिकता के इस दौर में भी "ऑनर किलिंग" जैसी कुप्रथा समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। अपनी ही संतानों की जान लेना कहाँ का न्याय है? यह घटना न केवल एक परिवार की तबाही है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी हार है।

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