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“देश सबसे ऊपर: तिरंगा, वंदे मातरम् और राष्ट्रभक्ति की अनिवार्यता”

(संपादकीय हेतु परिष्कृत हिंदी संस्करण)
— कृष्ण चंद्र दास, प्रेस मेंबर एवं चीफ एडिटर, द इंडिविजुअल पब्लिकेशन
अनुराग ठाकुर का वक्तव्य अत्यंत स्पष्ट और राष्ट्रहित में है—देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिए, ध्वज के सामने शीश नवाना चाहिए और ‘वंदे मातरम्’ गान गर्व के साथ गाना चाहिए। इस विषय में किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए।
देश के राष्ट्रवादी मुस्लिम नागरिकों ने इस विवाद का उत्तर अपने आचरण से दे दिया है। उन्होंने तिरंगे को सम्मान देकर और ‘वंदे मातरम्’ गाकर यह सिद्ध किया है कि देशभक्ति किसी धर्म की मोहताज नहीं होती। यहां तक कि अरब देशों में भी मुस्लिम समुदाय के कंठ से ‘वंदे मातरम्’ की गूंज बार-बार सुनाई दी है। यह भारत की आत्मा और उसकी सार्वभौमिक संस्कृति का प्रमाण है।
दुर्भाग्यवश, आज भी कुछ राजनीतिक स्वार्थी तत्व और कुछ कट्टरपंथी विचारधाराएं जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर विवाद जीवित रखे हुए हैं। इसका सबसे अधिक नुकसान देश के पिछड़े और वंचित मुस्लिम समाज को हुआ है। मुख्यधारा में आने के बजाय उन्होंने कठोर विचारधाराओं के प्रभाव में रहकर अपने सामाजिक और आर्थिक विकास के अवसर खो दिए। आज भी वे उन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं।
स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद यदि किसी सरकार ने पिछड़े मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए वास्तविक और ठोस कार्य किए हैं, तो वह केवल और केवल मोदी सरकार है। यह बात कोई भावनात्मक दावा नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं, जिसे देश का मुस्लिम समाज भी निष्पक्ष रूप से स्वीकार कर रहा है।
जो लोग आज भी इसे स्वीकार नहीं करते, वे वही समूह हैं जिन्होंने देश के लिए कुछ करने के बजाय केवल अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति की है। यही लोग विवाद पैदा करते हैं, समाज को भ्रमित करते हैं और राष्ट्रविरोधी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं।
अनुराग ठाकुर ने जो कहा है, वह पूर्णतः सही है। अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश के पक्ष में कौन खड़ा है और कौन विरोध में। यह भी सामने आना चाहिए कि देश के साथ गद्दारी कौन कर रहा है। “चुपचाप गलत काम करके किसी को पता न चले”—इस परंपरा को अब समाप्त करना ही होगा।
देश में सख्त कानून होना अनिवार्य है। जो देश के संविधान, कानून और व्यवस्था को नहीं मानेगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति देश से ऊपर नहीं हो सकता। देश सबसे ऊपर है।
इसीलिए संविधान में ऐसे प्रावधान और भी सशक्त होने चाहिए कि जो राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान नहीं करेगा और ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो और उसे देशद्रोही माना जाए। जो देश का नहीं हो सकता, उसके लिए इस देश में कोई स्थान नहीं होना चाहिए—चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो या किसी भी धर्म का हो।
स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी वही विवाद, वही राजनीति और वही भ्रम आज भी जारी है, क्योंकि इन विवादों को जानबूझकर जीवित रखा गया है। इसी कारण समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का लागू होना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
देश के सामान्य नागरिकों, विशेषकर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकार का स्पष्ट और सशक्त संदेश पहुंचना चाहिए। सरकार को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी देनी होगी। साथ ही जो लोग गलत नैरेटिव फैला रहे हैं, उन्हें जनता के सामने उजागर करना भी उतना ही आवश्यक है। यह कोई कठिन कार्य नहीं है—केवल एक मजबूत और ईमानदार नेटवर्क की आवश्यकता है।
अंततः, देश धर्म से नहीं, राष्ट्रभक्ति से चलता है। तिरंगा हमारा सम्मान है, ‘वंदे मातरम्’ हमारी आत्मा है और भारत हमारी पहचान।
धन्यवाद।
— कृष्ण चंद्र दास
प्रेस मेंबर एवं चीफ एडिटर
द इंडिविजुअल पब्लिकेशन

Jurisdiction Kolkata High Court Only.

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The End

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