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महा-खुलासा: 'हिंदूवादी' मुखौटे के पीछे सवर्ण-विरोधी साजिश? मध्य प्रदेश में उबल रहा है ब्राह्मण-राजपूत समाज

✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा Iभोपाल
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर अब गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वह 'हिंदुत्व' की आड़ में सवर्णों के दमन और 'बहुजन तुष्टीकरण' की राह पर चल पड़ी है। प्रदेश के विभिन्न कोनों से आ रही खबरें एक भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं।
जिलेवार आंकड़ों ने खोली सरकार की पोल:
• उज्जैन और इंदौर (लव-जिहाद का गढ़): आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र उज्जैन और प्रभार वाले जिले इंदौर में लव-जिहाद के मामलों में 35% की बढ़ोतरी हुई है। सवर्ण समाज का आरोप है कि 'हिंदूवादी' मुख्यमंत्री के होते हुए भी हिंदू बेटियों की सुरक्षा खतरे में है।
• ग्वालियर-चंबल (बढ़ता अपराध): ग्वालियर संभाग में पिछले कुछ हफ्तों में अहीर और दलित समूहों द्वारा सवर्णों पर हमले और उत्पीड़न के मामलों में पुलिस की सुस्ती चर्चा का विषय है। एक अहीर दलित लड़की के साथ हुए बलात्कार के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने में एक हफ्ते की देरी सरकार की मंशा पर सवाल उठाती है।
• जमीन कब्जे का खेल: मुख्यमंत्री के करीबियों और रिश्तेदारों पर किसानों और सवर्णों की जमीन कब्जाने के आरोप लग रहे हैं। नीलेश यादव जैसे नामों पर उठते सवाल अब जन-आक्रोश का रूप ले रहे हैं।
कसाईखानों को 'खैरात' में सरकारी जमीन?
रिपोर्टों के अनुसार, असलम जैसे व्यक्तियों को करोड़ों की कीमत वाले कसाईखाने महज 4 लाख रुपये जैसी मामूली राशि में आवंटित किए गए हैं। इन कसाईखानों में खुलेआम गौ-वंश का कटान हो रहा है। समाज पूछ रहा है कि क्या यही भाजपा का 'गौ-सेवा' संकल्प है?
प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं की तीखी प्रतिक्रिया:
इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों ने अपनी राय रखी है:
"भाजपा अब 'भारतीय जनता पार्टी' नहीं रही, यह 'बहुजन जनता पार्टी' (BJP) बन चुकी है। सवर्णों के वोट लेकर उन्हीं की जड़ों को काटना संघ और भाजपा की नई रणनीति है।" — अध्यक्ष, सवर्ण एकता मंच
"हम चुप नहीं बैठेंगे। ग्वालियर से लेकर भोपाल तक, यदि सवर्णों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करना बंद नहीं हुआ और गौ-हत्यारों को संरक्षण मिलता रहा, तो हम इस सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे।" — युवा नेता, ब्राह्मण समाज
निष्कर्ष: महाराष्ट्र मॉडल का विस्तार?
विशेषज्ञों का कहना है कि संघ और भाजपा अब मध्य प्रदेश में वही 'सवर्ण-विरोधी' कार्ड खेल रहे हैं जो दशकों पहले महाराष्ट्र में शुरू किया गया था। सवर्णों के खिलाफ बहुजन संगठनों को खड़ा करना और समाज को जातियों में बांटकर सत्ता हथियाने का यह खेल अब सवर्ण समाज की समझ में आने लगा है।
अगला कदम: मध्य प्रदेश के समस्त सवर्ण संगठनों ने आगामी दिनों में भोपाल में एक 'महासम्मेलन' बुलाने का निर्णय लिया है, जहाँ इस 'सनातन विरोधी' तंत्र के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जाएगा।

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