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दिल्ली उपराजयपाल दिल्ली कमेटी प्रबंधको का कार्यकाल खत्म होने के बाद और समय न दें, चुनाव का करें ऐलान: परमजीत सिंह वीरजी

नई दिल्ली, 15 जनवरी (मनप्रीत सिंह खालसा):- दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी का मौजूदा कार्यकाल 22 जनवरी, 2026 को खत्म हो रहा है। नियमों के मुताबिक, अब तक चुनाव की तारीख का ऐलान हो जाना चाहिए था, लेकिन समय पर कोई एक्शन न लेने की वजह से चुनाव का ऐलान नहीं हो सका और यह चिंता की बात है कि सिखों के मामलों में सरकारें इतनी बेपरवाह क्यों हैं। यह बातें गुरुबानी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन और दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के धर्म प्रचार विंग के पूर्व को-चेयरमैन सरदार परमजीत सिंह वीरजी ने मौजूदा कमेटी प्रबंधको पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आज जब सत्ता हाथ से जाती दिख रही है, तो यह लोग दिल्ली के उपराजयपाल से 3 महीने की एक्सटेंशन मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमेटी प्रबंधको को बताना चाहिए कि उन्होंने पिछले चार सालों में कौम के लिए कौन सा सराहनीय काम किया है। क्या उन्होंने कोई हॉस्पिटल बनवाया है..? क्या कोई नया स्कूल/कॉलेज बना है..? बहुत सारे सवाल सामने हैं जिनके बारे में आपसे समय-समय पर जवाब मांगा जाएगा। जबकि असलियत यह है कि कमेटी मैनेजमेंट में चल रहे ज़्यादातर स्कूलों में विद्यार्थीओ की संख्या कम हो गई है और स्कूलों पर भारी बकाया हो गया है, जिसकी वजह से मामला कोर्ट में पहुंच गया है, कोर्ट ने कमेटी की कुछ प्रॉपर्टी की कीमत लगाने के आदेश जारी किए हैं व आपको कोर्ट ने दोषी करार दिया जा चूका है। उन्होंने कहा कि यह आपकी कामयाबी है कि कुछ स्कूल और कॉलेज बंद हो गए हैं और भारी कर्ज के कारण कमेटी की कुछ जायदाद कुर्क होने की नौबत आ गई है। धर्म प्रचार के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म प्रचार मुखिया गूंगा है और उन्हें कुछ नहीं पता कि उस पंथ का प्रचार कैसे किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब धर्म प्रचार शताब्दी समारोह नहीं कर सका और वह भी सरकार ने किया, तो कौम के लिए इससे ज़्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि मैं लेफ्टिनेंट गवर्नर जी से अपील करता हूं कि ऐसी कमेटी को किसी भी तरह का समय न दिया जाए। साथ ही संगत से भी अपील है कि वह कमेटी प्रबंधको की मंशा को समझें, ज़्यादा से ज़्यादा वोट पाएं और पंथ के हित में योगदान दें। क्योंकि वह वोट कम बनने का बहाना बनाकर कमेटी पर कब्ज़ा बनाए रखना चाहते हैं और आप उनके कार्यकाल की उपलब्धियों से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं इसलिए अब बदलाव का समय है, इसलिए आपको पंथ की अनमोल धरोहर को बचाने के लिए आगे आने की ज़रूरत है।

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