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मिशन शक्ति बनी मासूम की ढाल, 2 घंटे में लौटाई नन्ही मुस्कान गुड़िया थामे बैठी थी बच्ची, पुलिस ने थाम लिया भरोसा

फतेहगंज पश्चिमी (बरेली)।
जब हर मिनट अनमोल हो और सामने एक तीन साल की मासूम हो, तब अगर पुलिस वर्दी सिर्फ कानून नहीं बल्कि ममता और संवेदना बन जाए—तो उसे ही कहते हैं मिशन शक्ति। थाना फतेहगंज पश्चिमी पुलिस की मिशन शक्ति टीम ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया, जिसकी अब हर तरफ सराहना हो रही है।
बुधवार रात करीब 8:30 बजे ग्राम अगरास में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास एक नन्ही बच्ची गुड़िया पकड़े अकेली बैठी मिली। न नाम पता, न पहचान—बस मासूम आंखों में डर और इंतजार। सूचना मिलते ही पीआरवी और थाना फतेहगंज पश्चिमी की मिशन शक्ति टीम हरकत में आ गई।
बच्ची को तत्काल थाने लाकर महिला हेल्प डेस्क पर सुरक्षित रखा गया, जहां महिला कांस्टेबल रानी ने उसे मां जैसी ममता दी। उधर मिशन शक्ति टीम ने फोन, नेटवर्क और सूझबूझ का ऐसा जाल बिछाया कि पूरे इलाके में सूचना दौड़ पड़ी।
महज दो घंटे के भीतर पुलिस की मेहनत रंग लाई और रात करीब 10:15 बजे मासूम की पहचान अदश्री पुत्री राहुल शर्मा, निवासी ग्राम सिखेरा (जनपद कासगंज) के रूप में हुई, जो अपने नाना के घर ग्राम अगरास आई थी।
सूचना मिलते ही जैसे ही परिजन थाने पहुंचे और बच्ची को सुरक्षित पाया—आंखों से आंसू नहीं, सुकून बह रहा था। परिजनों ने पुलिस का हाथ पकड़कर धन्यवाद कहा और कहा—“आज वर्दी ने हमारी बेटी बचा ली।”
इस सराहनीय कार्य में महिला उपनिरीक्षक स्नेहा लौर, महिला कांस्टेबल मनोरमा वर्मा, निशा और रानी की तत्परता, संवेदनशीलता और टीमवर्क काबिल-ए-तारीफ रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फतेहगंज पश्चिमी पुलिस सिर्फ अपराध से नहीं लड़ती, बल्कि इंसानियत की भी हिफाजत करती है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब पुलिस जागरूक हो, तो हर मासूम सुरक्षित है, हर परिवार निश्चिंत है और हर वर्दी सम्मान के काबिल है।

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