
झुग्गी झोपड़ी के बच्चों की तकदीर बदल रहे विनोद नायक 200 से अधिक बच्चों को दे रहे निशुल्क शिक्षा
झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों की तकदीर बदल रहे विनोद नायक, 200 से अधिक बच्चों को दे रहे नि:शुल्क शिक्षा
हनुमानगढ़। विनोद खन्ना गोगामेडी
कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। जिले के नोहर तहसील के गांव मलवानी निवासी विनोद कुमार नायक ने इस बात को सच कर दिखाया है। विनोद पिछले तीन सालों से राजस्थान और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में ईंट भट्ठों और झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैला रहे हैं। उनकी 'एकता फाउंडेशन' पाठशाला के माध्यम से आज 200 से अधिक बच्चे क ख ग सीखकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
भट्ठों से निकलकर स्कूलों तक पहुंचे 40 बच्चे।
विनोद नायक की इस अनूठी पहल का सबसे बड़ा सुखद परिणाम यह रहा है कि अब तक 40 बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाया जा चुका है। इनमें ऐलनाबाद पाठशाला से 25 बच्चे, मलवानी ईंट भट्टा पाठशाला से 8 और मलेका केंद्र से 7 बच्चे शामिल हैं। ये बच्चे अब कक्षा 3 से 6 के बीच नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं। विनोद का लक्ष्य है कि आगामी सत्र 2026-27 तक 100 से अधिक वंचित बच्चों का सरकारी स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
4 केंद्रों पर संचालित हो रही है पाठशाला।
इस मुहिम की शुरुआत मलवानी के एक ईंट भट्ठे पर मात्र 20 बच्चों के साथ हुई थी। आज जन सहयोग के माध्यम से ऐलनाबाद, मलेकां, मलवानी और नोहर में चार स्थानों पर नि:शुल्क पाठशालाएं चल रही हैं। हाल ही में राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल राजेश कुमार साहरण ने भी इस पहल में सहयोग करते हुए अपने बच्चों के जन्मदिन पर विद्यार्थियों को किताबें भेंट कीं।
"कचरा बीनने की मजबूरी और संसाधनों का अभाव।
विनोद कुमार ने बताया कि इन बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना काफी चुनौतीपूर्ण है। दोपहर में जब भोजन की छुट्टी होती है, तो बच्चे अक्सर वापस नहीं आते और कचरा बीनने या काम करने निकल जाते हैं। विनोद ने बताया, "हमें दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) की सख्त जरूरत है ताकि बच्चे दिनभर केंद्र पर ही रहें। साथ ही बच्चों के पास स्कूल ड्रेस और पर्याप्त पाठ्य सामग्री का भी अभाव है।"
भामाशाहों से सहयोग की अपील
विनोद का सपना है कि इन बच्चों के लिए एक आवासीय भवन का निर्माण हो, जहाँ वे सुरक्षित और बेहतर माहौल में रह सकें। उन्होंने समाज के भामाशाहों और दानदाताओं से अपील की है कि वे इन बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए ड्रेस, स्टेशनरी और भोजन व्यवस्था में सहयोग करें ताकि इन नौनिहालों का कलम पकड़ने वाला हाथ कचरा बीनने को मजबूर न हो।