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☀️🪁🌾🙏 इस साल 15 जनवरी को क्यों मनाई जा रही है मकर संक्रांति?

AIMA MEDIA | विशेष रिपोर्ट
✒️ हरिदयाल तिवारी
☀️ भारतीय सनातन परंपरा का प्रमुख सौर पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन इस बार शास्त्रीय नियमों के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जा रहा है।
खगोलीय गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात लगभग 9 बजकर 35 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसी क्षण को वास्तविक संक्रांति कहा जाता है। लेकिन हिंदू पंचांग परंपरा में धार्मिक कर्मों के लिए उदय तिथि को महत्व दिया गया है।
उदय तिथि का सिद्धांत क्या कहता है?
शास्त्रों के अनुसार जिस तिथि की उपस्थिति सूर्योदय के समय होती है, वही तिथि स्नान, दान, पूजा और पर्व के लिए मान्य होती है।
चूंकि इस वर्ष सूर्य का मकर में प्रवेश रात में हो रहा है, इसलिए संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन यानी 15 जनवरी की सुबह से आरंभ माना गया है।
इसी कारण — ➡️ खगोलीय संक्रांति — 14 जनवरी की रात
➡️ धार्मिक पर्व व पुण्यकाल — 15 जनवरी
15 जनवरी को क्यों होगा स्नान-दान और खिचड़ी पर्व?
मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना, सरयू जैसी पवित्र नदियों में स्नान, तिल दान, गौ सेवा, सूर्य उपासना और खिचड़ी दान का विशेष महत्व है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार यह सभी पुण्य कार्य इस वर्ष 15 जनवरी को करना श्रेष्ठ माना गया है।
परंपरा और विज्ञान का संगम
मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक है। यह ऋतु परिवर्तन, नई फसल और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है।
निष्कर्ष
इस वर्ष मकर संक्रांति शास्त्रीय उदय तिथि के अनुसार 15 जनवरी को मनाई जा रही है।

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