संगमरमर की नगरी मकराना में आचार्यश्री महाश्रमण का भावपूर्ण स्वागत
मकराना - जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी का बुधवार को संगमरमर की नगरी मकराना में शुभागमन हुआ। आचार्यश्री के नगर में प्रवेश करते ही मकराना की धरा आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो उठी। मकरानावासियों ने अपने आराध्य का भावभीना स्वागत कर स्वयं को धन्य माना। स्वागत समारोह में संप्रदाय की सीमाएं गौण रहीं और जैन-अजैन सभी श्रद्धालु आचार्यश्री के दर्शन से लाभान्वित हुए।आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ नगर स्थित सामुदायिक भवन पहुंचे, जहां आयोजित मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित जनसमूह को पावन मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के दुःख आते हैं। इनसे मुक्ति के लिए आत्मानुशासन और संयम आवश्यक है। व्यक्ति को अपनी वाणी, शरीर और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए। कटु वचन से बचना तथा आत्मसंयम को अपनाना जीवन को सुखमय बनाता है।आचार्यश्री ने अणुव्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयं का अनुशासन ही दुःखों से मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने मकरानावासियों में धार्मिक भावना, सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की कामना व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्रेक्षाध्यान का संक्षिप्त प्रयोग भी कराया। साध्वीप्रमुखाजी ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया।स्वागत समारोह में मकराना तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी एवं नरेश भण्डारी ने भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन गेसावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्वेताम्बर जैन संघ की महिलाओं एवं तेरापंथ कन्या मंडल द्वारा भक्ति प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।