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सेवानिवृत्त अधिकारी संजीव संजय ने अपनी जमा पुंजी और अपने अनुभव को गरीब बच्चों की शिक्षा में लगाने का उठाया बीड़ा...

हाजीपुर प्रखंड के पानापुर लंगा पंचायत निवासी एलआईसी सेवानिवृत अधिकारी संजीव संजय 2019 में सेवानिवृत होने के बाद 2020 में अपने गाँव में किशोरी देवी स्मृति न्यास शिक्षण केंद्र की शुरुआत कर गांव के गरीब और असहाय बच्चों को अपने दरवाजे पर निःशुल्क शिक्षा और विशेष कोचिंग देना शुरु किये।

विधालय कक्षा में बच्चों की संख्या बढ़ते देख वर्ष 2024 में पानापुर लंगा स्थित सुप्रसिध्द बाबा बसावन भुइयां मंदिर ट्रस्ट की ओर से निःशुल्क परिसर उपलब्ध कराया गया। जहां वे शिक्षा से वंचित तबके के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक निःशुल्क शिक्षा देना शुरु किये। संजीव संजय बताते हैं कि उन्होंने अपने नौकरी के दिनों में कई बार विश्वविद्यालयों और महापुरुषों की पुण्यतिथियों पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वहीं से उनके मन में एक विचार उपजा यदि हम इन महापुरुषों के विचार और संदेश समाज के अंतिम पायदान तक बैठे लोगों तक पहुंचाने का मन बनाया। और यह तब ही संभव हुआ जब सेवानिवृत होकर घर आने पर बच्चों को

शिक्षा देने के लिए निःशुल्क कोचिंग शुरु की। उन्होंने बताया कि शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़कर समाज के मुख्य धारा में लाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से गरीब और असहाय बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना शुरु किया।

सेवानिवृत अधिकारी संजीव संजय बताते है कि स्थित बाबा बसावन भुइयां मंदिर ट्रस्ट की ओर मिले परिसर में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए सात शिक्षकों को बहुत ही कम मानदेय दिया जाता है। यहां बच्चों से नहीं के बराबर फीस ली जाती है। वैसे अभिभावक जो कुछ शिक्षण शुल्क देते है या नहीं भी देते वैसे बच्चों को नियमित शिक्षा के साथ अन्य आवश्यक पठन-पाठन उपलब्ध कराया जाता है।

नवोदय और सैनिक स्कूल के लिए शुरु किया निःशुल्क तैयारी

संजीव संजय बताते है कि प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ते हुए अभिभावकों की सलाह पर वर्ष 2024 में संस्था ओर पांच बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर नवोदय विद्यालय में नामांकन के लिए तैयारी शुरु कराना शुरु किया। जिसमें प्रथम की वर्ष ही पानापुर लंगा गांव के छात्र आदर्श कुमार ने सफलता प्राप्त कर संस्थान का मान बढ़ाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में संस्थान ने नौ बच्चों को चार माह से परीक्षा की तैयारी करा कर परीक्षा में शामिल कराया है, जिनके परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।

बदल रही समाज की सोच शिक्षण केंद्र ने सिर्फ बच्चों की

जिंदगी नहीं बदली, बल्कि उनके परिवारों और समाज की सोच को भी प्रभावित किया है। मजदूर वर्ग के लोग अब समझने लगे हैं कि शिक्षा ही उनके बच्चों के भविष्य की कुंजी है। संजीव संजय कहते हैं जब हम माता-पिता को समझाने जाते थे तो वे कहते थे कि उनके पास पैसे नहीं हैं। जब उन्हें भरोसा दिलाया कि पढ़ाई मुफ्त होगी तो लोग अपने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजना शुरु किये।संजीव संजय के द्वारा किये जा रहे इस नेक कार्य को लेकर गाँव के लोग काफी प्रशंसा करते हैं।

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