
आयुष्मान घोटाले का बड़ा खुलासा सिंगरौली में कार्ड -कागज़ कमीशन का पुरा खेल बेनकाब बैढ़न सिंगरौली मध्य प्रदेश
आयुष्मान घोटाले का बड़ा खुलासा: सिंगरौली में “कार्ड–काग़ज़–कमीशन” का पूरा खेल बेनकाब
सिंगरौली जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत सामने आए कथित घोटाले ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यह फर्जीवाड़ा आखिर होता कैसे है? पीड़ितों, स्थानीय सूत्रों और जानकारों के अनुसार, निजी अस्पतालों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीक़े लगभग एक जैसे हैं और पूरी योजना को लूट का ज़रिया बना दिया गया है।
कथित तौर पर आयुष्मान कार्ड में घोटाला करने के प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं—
1. कार्ड जब्ती का खेल
मरीज जैसे ही अस्पताल पहुंचता है, उसका आयुष्मान कार्ड “काग़ज़ी प्रक्रिया” के नाम पर अस्पताल अपने पास रख लेता है। इसके बाद मरीज को यह तक नहीं पता होता कि उसके कार्ड से कितनी राशि और किस इलाज के नाम पर निकाली गई।
2. फर्जी भर्ती और काग़ज़ी इलाज
बिना मरीज को भर्ती किए ही सिस्टम में ICU, सर्जरी, इमरजेंसी या लंबी भर्ती दर्शा दी जाती है। कई मामलों में मरीज घर पर होता है, लेकिन रिकॉर्ड में वह कई दिन अस्पताल में भर्ती दिखाया जाता है।
3. बिना जानकारी के महंगे पैकेज क्लेम
दंत, आंख, हड्डी, स्त्री रोग या सामान्य इलाज के नाम पर लाखों रुपये के पैकेज क्लेम कर लिए जाते हैं, जबकि वास्तव में मामूली या बिल्कुल भी इलाज नहीं हुआ होता।
4. “5 लाख का पैकेज–3 लाख अस्पताल” मॉडल
सूत्रों का दावा है कि 5 लाख रुपये तक का इलाज दिखाकर सरकार से भुगतान लिया जाता है। इसमें से करीब 3 लाख रुपये अस्पताल अपने पास रखता है और शेष राशि आयुष्मान कार्ड धारक को देकर उसे चुप कराया जाता है—इसे ही अंदरूनी भाषा में “सेटिंग” कहा जाता है।
5. निजी बिल का दबाव
आयुष्मान योजना में इलाज पूरी तरह मुफ्त होने के बावजूद मरीजों को निजी बिल थमा दिया जाता है। सवाल करने पर इलाज बंद करने या अगली बार कार्ड न चलने की धमकी दी जाती है।
6. एक ही मरीज पर कई बार क्लेम
कई मामलों में एक ही आयुष्मान कार्ड पर अलग-अलग तारीखों में अलग-अलग इलाज दिखाकर बार-बार भुगतान निकाला जाता है, जबकि मरीज को इसकी कोई जानकारी नहीं होती।
7. दलाल और रेफरल नेटवर्क
आरोप है कि कुछ एजेंट, कर्मचारी और दलाल गांव-गांव जाकर मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों तक लाते हैं, ताकि उनके कार्ड का इस्तेमाल क्लेम के लिए किया जा सके।
8. जांच से पहले “रिकॉर्ड क्लीन”
जब कभी जांच की सुगबुगाहट होती है, तो रिकॉर्ड अपडेट कर दिए जाते हैं, फाइलें दुरुस्त कर दी जाती हैं और बाद में वही काग़ज़ जांच में “सब ठीक” साबित कर दिए जाते हैं।
इन कथित तरीकों से आयुष्मान योजना, जो गरीबों के इलाज की गारंटी है, उसे लूट की मशीन में बदला जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतनी शिकायतों के बावजूद अब तक न तो बड़े स्तर पर ऑडिट हुआ, न ही दोषियों पर ठोस कार्रवाई दिखी।
अब सवाल सीधा है—
क्या आयुष्मान योजना गरीबों के लिए है, या कुछ निजी अस्पतालों की कमाई की गारंटी बन चुकी है?
क्या सिंगरौली में इस पूरे नेटवर्क की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच होगी?
जनता अब सिर्फ बयान नहीं, कार्रवाई चाहती है।
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