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बेटियां हैं सृष्टि का आधार, उनके बिना सूना है संसार: पीएचसी कस्सोआणा में गूंजी 'धीयां दी लोहड़ी' की खुशियां ​हर क्षेत्र में बुलंदियों को छू रही हैं बे

बेटियां हैं सृष्टि का आधार, उनके बिना सूना है संसार: पीएचसी कस्सोआणा में गूंजी 'धीयां दी लोहड़ी' की खुशियां
​हर क्षेत्र में बुलंदियों को छू रही हैं बेटियां, देश का मान बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य: डॉ. बलकार सिंह
​कस्सोआणा/फिरोजपुर (जोगिंदर सिंह खालसा):
समाज की संकीर्ण सोच को बदलने और बेटियों को बेटों के समान स्नेह व सम्मान देने का संदेश लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक सराहनीय पहल की है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव पराशर के दिशा-निर्देशों और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. बलकार सिंह के नेतृत्व में ब्लॉक कस्सोआणा के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में 'धीयां दी लोहड़ी' का पर्व किसी उत्सव की तरह मनाया गया।
​आंगन में चहकती बेटियां, परिवार की असली पूंजी
​समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. बलकार सिंह ने भावुक शब्दों में कहा, "बेटियां केवल एक कुल का दीपक नहीं, बल्कि दो कुलों की शान होती हैं। आज की बेटी अब बेचारी नहीं, बल्कि देश का गौरव है।" उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग बेटियों के जन्म से लेकर उनके सर्वांगीण विकास के लिए वचनबद्ध है। छोटी बच्चियों का मुफ्त उपचार और किशोरियों के लिए स्वास्थ्य परामर्श केंद्र इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
​इन केंद्रों में दिखा बेटियों के प्रति सम्मान का जज्बा
​ब्लॉक एजुकेटर विक्रमजीत सिंह और डॉ. करनबीर सिंह ने बताया कि कोहाला, मल्लूवालिये वाला, खोसा दल सिंह, लोंगोदेवा, ठट्ठा किशन सिंह और मल्लो के जैसे विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में लोहड़ी की अग्नि जलाकर बेटियों की लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र हो या विज्ञान, खेल हो या राजनीति—बेटियां हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
​समाज को चेतावनी: "कोख में न मारो सपनों को"
अधिकारियों ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप में लिप्त हैं, उनके लिए समाज और कानून में कोई जगह नहीं है। लिंग जांच करवाना कानूनन जुर्म है, जिसमें दोषी को न केवल जेल की हवा खानी होगी बल्कि भारी जुर्माना भी भुगतना होगा।
​सम्मानित हुईं 'नन्हीं परी' और उनकी जागरूक माएं
​इस जागरूकता सेमिनार की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखी जब स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन नन्हीं बच्चियों को सम्मानित किया गया, जिनका टीकाकरण (Immunization) समय पर पूरा किया गया है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि एक मां और बेटी के रूप में स्त्री ही समाज की वास्तविक शिल्पकार है।
​इस अवसर पर सीएचओ अकविंदर कौर, अमनजोत कौर और समस्त स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने समाज को यह संकल्प दिलाया कि बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि 'वरदान' समझा जाए।

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