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समायोजन प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों का आरोप, संशोधन का मिला आश्वासन

शाहजहांपुर। परिषदीय शिक्षकों की सरप्लस समायोजन प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा ऐतराज जताया है। संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिकान्त पाण्डेय ने मंगलवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा की गई समायोजन कार्यवाही को शासनादेश व न्यायालय के आदेशों के विपरीत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की।

जिलाधिकारी से वार्ता के बाद संघ पदाधिकारियों ने बीएसए से भी मुलाकात कर समायोजन प्रक्रिया में हुई त्रुटियों पर बिंदुवार चर्चा की। इस दौरान जिलाधिकारी और बीएसए ने आश्वासन दिया कि जिन आदेशों में विसंगतियां पाई गई हैं, उनमें आवश्यक संशोधन किया जाएगा और समायोजन की पूरी प्रक्रिया शासनादेश व न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही की जाएगी।

संघ के जिलाध्यक्ष ने बताया कि कई ऐसे विद्यालयों में, जहां एकल शिक्षक के रूप में प्रधानाध्यापक कार्यरत थे, उन्हें 150 से कम छात्र नामांकन के आधार पर अन्य विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया, जिससे संबंधित विद्यालय बंद हो गए। जबकि शासनादेश के अनुसार समायोजन केवल उन्हीं विद्यालयों में किया जाना है, जहां दो से अधिक शिक्षक कार्यरत हों। वहीं उच्च न्यायालय ने भी 150 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के समायोजन पर रोक लगा रखी है, जो अब भी प्रभावी है। इसके बावजूद ऐसे प्रधानाध्यापकों का समायोजन किया जाना न्यायालय की अवमानना और शासनादेश का उल्लंघन बताया गया।

संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी सेवा नियमावली के तहत जिन कार्मिकों की सेवा अवधि छह माह से कम शेष है, उन्हें स्थानांतरण अथवा समायोजन से मुक्त रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले कई शिक्षकों को समायोजन सूची में शामिल किया गया।

इसके अतिरिक्त, इस बार की समायोजन प्रक्रिया में दिव्यांग, महिला एवं गंभीर रोग से पीड़ित शिक्षकों को नियमानुसार काउंसलिंग का अवसर नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप कई महिला और दिव्यांग शिक्षकों को 60 से 80 किलोमीटर दूर विद्यालयों में तैनात कर दिया गया। यहां तक कि किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके एक शिक्षक को भी 65 किलोमीटर दूर भेजे जाने का आरोप लगाया गया।

संघ ने मांग की कि विसंगतिपूर्ण समायोजन प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए तथा शासन व न्यायालय के आदेशों के अंतर्गत सरप्लस शिक्षकों एवं एकल व बंद विद्यालयों की सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही महिला व दिव्यांग शिक्षकों को काउंसलिंग के माध्यम से विद्यालय चयन का अवसर दिया जाए और 150 से कम छात्र संख्या व दो से कम शिक्षक वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को समायोजन से पृथक रखा जाए।

इस दौरान जिलाधिकारी से हुई मुलाकात में संघ के रत्नाकर दीक्षित, अरविन्द वर्मा, नवनीत तिवारी, राजेश कुमार और वेद वर्मा भी उपस्थित रहें

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