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भारत की व्यापार नीति!

प्रेस वक्तव्य (हिंदी)
भारत की व्यापार नीति: रणनीतिक स्वायत्तता पर कोई समझौता नहीं
नई दिल्ली | प्रेस विज्ञप्ति
भारत ने सदैव विश्व समुदाय के साथ सद्भावना, पारस्परिक सम्मान और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के अंतर्गत संवाद किया है। किंतु इतिहास स्पष्ट और निर्विवाद है—भारत किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या जबरदस्ती के आगे नहीं झुका है, न झुकेगा।
हाल के दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार एवं शुल्क (टैरिफ) वार्ताओं को लेकर जो बयानबाज़ी सामने आई है, उस पर सार्वजनिक विमर्श स्वाभाविक है। इसे ऐतिहासिक और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखना आवश्यक है।
1990 के दशक के उत्तरार्ध में, राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान, भारत पर प्रतिबंधों, प्रौद्योगिकी रोक और व्यापारिक दबावों का सामना करना पड़ा। उस समय भी भारत ने समर्पण नहीं किया। बल्कि, अल्पकालिक चुनौतियों को सहन करते हुए आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ किया और एक सम्मानित वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा।
आज की परिस्थिति भले ही स्वरूप में भिन्न हो, परंतु दबाव की प्रवृत्ति परिचित है। किसी भी प्रकार का व्यापारिक दबाव—यदि वह धमकी या बाध्यता के स्वर में हो—भारत के किसानों, एमएसएमई, रणनीतिक उद्योगों, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जनहित नीतियों को कमजोर नहीं कर सकता।
भारत की स्थिति स्पष्ट है:
संवाद, न कि दबाव
वार्ता, न कि बाध्यता
साझेदारी, न कि प्रभुत्व
भारत अमेरिका सहित सभी देशों के साथ रचनात्मक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है। किंतु किसी भी व्यापार समझौते का संतुलित, पारस्परिक और भारत की संसदीय एवं घरेलू प्राथमिकताओं के अनुरूप होना अनिवार्य है।
आज का भारत 1990 के दशक वाला भारत नहीं है।
यह 3.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था, वैश्विक विनिर्माण व तकनीकी केंद्र, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक प्रमुख स्तंभ है।
भारत के साथ व्यापारिक टकराव किसी के हित में नहीं है—न भारत के, न किसी अन्य राष्ट्र के। भारत टकराव नहीं चाहता, किंतु दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
एक संप्रभु लोकतंत्र और सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में भारत जानता है:
अस्थायी दबाव सहा जा सकता है, स्थायी समर्पण नहीं।
भारत चुनौती स्वीकार करता है।
भारत दृढ़ता से उत्तर देता है।
भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
— समाप्त —

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