logo

जिले के 5 नगरीय निकायों में 4.44 करोड़ का अनियमित भुगतान, जवाब भी नहीं दे रहे

जिले के पांच नगरीय निकायों में पिछले सालों में 4 करोड़ 44 लाख रुपए के अनियमित भुगतान हो गए। ठेकेदारों पर अधिकारियों की ऐसी मेहरबानी रही कि उन्हें टेंडर से अधिक भुगतान तो कर दिया, लेकिन जब ऑडिट ने यह मामला पकड़ा तो अब नगरीय निकाय के अधिकारी जवाब देने से ही बच रहे हैं। सबसे ज्यादा 1 करोड़ 45 लाख 98 हजार 282 रुपए का अनियमित भुगतान भी जिले के सबसे बड़े नगरीय निकाय झालावाड़ नगरपरिषद में हुआ है। ऐसे ही पांचों ही नगरीय निकायों में हुई गड़बड़ी स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग कोटा ने पकड़ ली, लेकिन अभी तक अनियमित भुगतान करने वालों से वसूली नहीं हो पाई है।
दरअसल, जिले के पांचों ही नगरीय निकायों में स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की टीम पहुंची। यहां पर डाटा खंगाला तो पता चला कि जो काम सालों से अधूरे पड़े हुए हैं उनको भी भुगतान कर दिया गया। इसी तरह से जितनी निर्माण स्वीकृति जारी हुई उससे अधिक राशि ठेकेदार को दे दी गई। अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने बिलों में कांट-छांट तक की गई है। इसके बाद भी अधिकारी किसी भी तरह से इन अनियमितताओं का जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इनमें से अधिकतर जगहों पर तो दूसरे अधिकारी आ गए हैं। तीन उदाहरणों से समझें ठेकेदारों को कैसे मनमर्जी से करते गए भुगतान 3. झालरापाटन नगरपालिका में दुकानों की नीलामी हुई।इन प्लॉटों की तिहाई राशि जमा करवाई जानी थी, लेकिन संबंधित व्यक्ति ने वह जमा नहीं की। इसके बाद भी नगरपालिका ने आवंटन निरस्त नहीं किया। नगरपालिका अभी तक 9 लाख 44 हजार 447 रुपए का नुकसान भुगत रही है। नगरपालिका झालरापाटन ने 2018 से 23 तक अपनी सक्षमता से अधिक आइटम खरीद कर लिए। इस खरीद का भुगतान बीएसआर दर से अधिक पर कर दिया गया। करीब 8 लाख 52 हजार 454 रुपए का अधिक भुगतान हुआ है।
^ सही है कि ऑडिट के कई जवाब बकाया चल रहे हैं। यह हमसे पहले के मामले हैं। एकाउंट्स से संबंधित मामला होने सम्ब​न्धित अधिकारियों तक पहुंचा दिए गए हैं। वहां से आने पर जवाब पहुंचाए जाएंगे।

- मनीष सिंह, एक्सईएन नगरपरिषद



















2
236 views