
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के ईको - सेंसिटिव जोन हेतु जोनल मास्टर प्लान पर माॅनिटरिंग समिति की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के ईको-सेंसिटिव ज़ोन हेतु जोनल मास्टर प्लान पर मॉनिटरिंग समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न
जोनल मास्टर प्लान स्पष्ट, व्यावहारिक एवं क्षेत्र-विशेष आधारित हो- कमिश्नर
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश के 26 राष्ट्रीय उद्यानों एवं वन्यजीव अभयारण्यों सहित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों (ईको सेंसटिव जोन) के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार किए जाने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी क्रम में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को भी ईएसजेड मास्टर प्लान की तैयारी हेतु सम्मिलित किया गया है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के लिए आवश्यक आधारभूत (बेसलाइन) अध्ययन परामर्शदाता संस्था मैसर्स सांई कंसल्टिंग इंजीनियर्स प्रा. लि. द्वारा पूर्ण कर लिए गए हैं। परामर्शदाता द्वारा तैयार की गई जोनल मास्टर प्लान की मसौदा रिपोर्ट संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। इस मसौदा रिपोर्ट के परीक्षण, समीक्षा एवं सुझावों के लिए गुरूवार को कमिश्नर कार्यालय, चंबल संभाग के सभागार में आयुक्त चंबल संभाग श्री सुरेश कुमार की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुरैना कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक श्री ललित भारती, वनमंडलाधिकारी मुरैना श्री हरीश चंद्र बघेल, कंसल्टेंसी की एनजीओ सैजल लोया, एसडीओ फॉरेस्ट श्री मधु सिंह सिसौदिया उपायुक्त राजस्व श्री बीएस जाटव सहित ईको-सेंसिटिव ज़ोन से जुड़े संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। वीसी के माध्यम से भिंड कलेक्टर श्री किरोड़ी लाल मीणा, श्योपुर कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा सहित संबंधित अधिकारी भी जुड़े हुये थे।
बैठक को संबोधित करते हुए कमिश्नर श्री सुरेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का ईको-सेंसिटिव ज़ोन पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है तथा इस क्षेत्र के सुव्यवस्थित, संतुलित एवं पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद से आई परामर्शदाता कंपनी द्वारा विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया, जिसमें ईएसजेड क्षेत्र एवं उसके आसपास प्रस्तावित विकास गतिविधियों, अनुमत कार्यों एवं प्रतिबंधित गतिविधियों की जानकारी दी गई। प्रेजेंटेशन के माध्यम से यह भी अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के विकास हेतु सुझाई गई गाइडलाइंस, पेंच एवं सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व में लागू व्यवस्थाओं के अनुरूप होंगी, जिससे जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ सतत पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके।
कमिश्नर श्री सुरेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जोनल मास्टर प्लान स्पष्ट, व्यावहारिक एवं क्षेत्र-विशेष आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेसलाइन सर्वे की संपूर्ण जानकारी संबंधित तीनों जिलों के कलेक्टरों के साथ साझा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-कौन से गांव एवं क्षेत्र ईको-सेंसिटिव ज़ोन के अंतर्गत आ रहे हैं। इसके साथ ही, सभी प्रभावित हितधारकों की विस्तृत सूची तैयार कर उनका स्पष्ट उल्लेख मास्टर प्लान में किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ईएसजेड क्षेत्र की गांव-वार एवं सर्वे नंबर-वार मैपिंग की जाए तथा रेवेन्यू मैप के साथ इसका समन्वय सुनिश्चित किया जाए। संबंधित राजस्व विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कंटूर मैप तैयार करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया में सहूलियत हो सके। प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी कलेक्टरों द्वारा रिकॉर्ड में फीड की जाए, ताकि दीर्घकालिक योजना तैयार करने में सुविधा मिल सके।
कमिश्नर ने चंबल नदी के दक्षिणी क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों के सत्यापन हेतु परामर्शदाता कंपनी को संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि ईएसजेड क्षेत्र के 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियों के संदर्भ में एमपीआईडीसी के प्रस्तावों के साथ भी समन्वय किया जाए, ताकि जोनल मास्टर प्लान एकीकृत एवं संतुलित रूप से तैयार किया जा सके। राजघाट पर प्रस्तावित इंटेक वेल से संबंधित समस्त तकनीकी एवं भौगोलिक विवरणों की जांच कर उन्हें मास्टर प्लान में सम्मिलित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मॉनिटरिंग समिति के सभी सदस्य अपने-अपने विभागीय सुझाव एवं टिप्पणियाँ लिखित रूप में प्रस्तुत करेंगे, ताकि उन पर गहन विचार-विमर्श कर अंतिम मसौदा तैयार किया जा सके।
बैठक के दौरान संभावित पर्यटन गतिविधियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इसमें लो-इम्पैक्ट टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, सोशियो-फॉरेस्ट्री, इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट गतिविधियाँ, नेचर ट्रेल एवं पाथवे निर्माण, सीमित एवं नियंत्रित जल-आधारित गतिविधियाँ, पर्यटन सहायक अधोसंरचना का विकास, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वाटरशेड मैनेजमेंट तथा चयनित क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं के विकास हेतु सड़क चौड़ीकरण एवं बस स्टॉप के प्रोत्साहन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कमिश्नर श्री सुरेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम योजना को स्वीकृत करने से पूर्व प्रस्तावित गतिविधियों की सटीक मैपिंग अनिवार्य रूप से की जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण एवं विकास के बीच संतुलन बना रहे। बैठक में प्राप्त सभी सुझावों एवं टिप्पणियों को सम्मिलित करते हुए जोनल मास्टर प्लान की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह परियोजना मध्यप्रदेश शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है, जिससे राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का संरक्षण सुनिश्चित करते हुए सतत एवं जिम्मेदार विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
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