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राजस्व प्रकरणों का त्वरित व न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित करें - संभागायुक्त

राजस्व प्रकरणों का त्वरित व न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित करें - संभागायुक्त

अवैध प्रविष्टि और कब्जों पर कड़ी निगरानी रखें

चंबल संभाग के आयुक्त श्री सुरेश कुमार ने राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया कि जरूरतमंद एवं गरीब नागरिकों को समय पर न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी राजस्व प्रकरणों का त्वरित, निष्पक्ष एवं न्यायसंगत निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा अवैध प्रविष्टियों और भूमि पर किए जा रहे अनधिकृत कब्जों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
आयुक्त श्री सुरेश कुमार शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष, मुरैना में आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक ले रहे थे।

बैठक में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, अपर कलेक्टर श्री अश्विनी कुमार रावत सहित समस्त एसडीएम, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार उपस्थित रहे।

आयुक्त ने कहा कि आरसीएमएस पोर्टल पर प्रकरण दर्ज करते समय यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक आवेदन उसी उपयुक्त हैड में दर्ज हो, जिसमें उसका वैधानिक एवं प्रभावी निराकरण संभव हो सके। गलत हैड में दर्ज प्रकरणों के कारण आमजन को अनावश्यक परेशानी होती है, जिसे गंभीरता से लिया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व प्रकरणों में जांच के सभी बिंदु तथ्यपरक एवं स्पष्ट हों। यदि किसी प्रकरण में शिकायत असत्य पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वस्तुस्थिति की पुष्टि के लिए मिशल बंदोबस्त अभिलेखों का उपयोग किया जाए, जिनकी प्रतियां पटवारी, जिला एवं कमिश्नर स्तर पर उपलब्ध रहती हैं।

चंबल आयुक्त ने शहरी क्षेत्रों में तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि नई कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों।

खसरा-खतौनी का नियमित निरीक्षण कर अवैध प्रविष्टियों को रोका जाए तथा किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न होने दिया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्व संबंधी मामलों का निराकरण तहसीलदार न्यायालय में बैठकर विधिसम्मत तरीके से किया जाए। कब्जा दिलाने की प्रक्रिया सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 38 के अंतर्गत सुनिश्चित की जाए। सभी राजस्व अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पटवारियों के माध्यम से बी-1 का वाचन कर अभिलेख अद्यतन कराएं।

आयुक्त ने कहा कि सरकार ने राजस्व अधिकारियों को व्यापक अधिकार प्रदान किए हैं, अतः ऐसे ठोस एवं प्रभावी आदेश पारित किए जाएं, जिससे गरीब एवं कमजोर वर्ग की भूमि सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि दानपत्र की भूमि यदि धारा 173 के अंतर्गत त्याग की जा रही हो, तो तहसीलदार द्वारा त्वरित सुनवाई निर्णय लिया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि बटवारे की प्रक्रिया केवल कागजी न रहकर मौके पर टीसीएम मशीन के माध्यम से भौतिक रूप से भी की जाए। बिना पक्षकारों को सुने किसी भी प्रकरण का अंतिम निराकरण न किया जाए—यह सुनिश्चित करना प्रत्येक राजस्व अधिकारी का दायित्व है।
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