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उत्तराखंड सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में अब जमीन से जुड़े विवादों के लिए लोगों को राजस्व न्यायालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे

देहरादून। आमजन को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में अब जमीन से जुड़े विवादों के लिए लोगों को राजस्व न्यायालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जल्द ही RCMS (Revenue Court Case Management System) पोर्टल का शुभारंभ करेंगे, जिसके माध्यम से भूमि संबंधी वाद ऑनलाइन दर्ज किए जा सकेंगे। राजस्व विभाग और उत्तराखंड राजस्व परिषद द्वारा विकसित इस पोर्टल के जरिए खारिज-दाखिल, सीमांकन, कब्जा विवाद सहित अन्य राजस्व मामलों को घर बैठे ही पंजीकृत किया जा सकेगा।

एनआईसी के सहयोग से तैयार किया जा रहा यह पोर्टल अंतिम चरण में है और शीघ्र ही आम जनता के लिए उपलब्ध होगा। सरकार की इस पहल से राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी। वाद दायर करने से लेकर सुनवाई की तारीख, आदेश और निर्णय तक की पूरी जानकारी वादकारी को मोबाइल फोन पर एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से मिलेगी। निर्णय आने के बाद आदेश की प्रति भी ऑनलाइन डाउनलोड की जा सकेगी। RCMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय वादकारी को खतौनी, पहचान पत्र और विवाद से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

साथ ही संबंधित न्यायालय का चयन भी पोर्टल पर ही किया जाएगा। न्यायालय शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से किया जा सकेगा। प्रदेश में वर्तमान में तहसीलदार, एसडीएम, जिलाधिकारी, आयुक्त और राजस्व परिषद के न्यायालयों में 50 हजार से अधिक राजस्व वाद लंबित हैं। राजस्व सचिव डॉ. एस.एन. पांडेय के अनुसार, प्रक्रिया ऑनलाइन होने से मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, न्यायालयों पर दबाव कम होगा और कामकाज में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ेगी। डिजिटल क्रांति के इस दौर में सरकार पहले ही राजस्व विभाग की कई सेवाओं को ऑनलाइन कर चुकी है।
‘अपणि सरकार’ पोर्टल के माध्यम से जाति, आय, मूल निवास, अधिवास और हैसियत प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब RCMS पोर्टल के जुड़ने से राजस्व न्याय व्यवस्था भी तकनीक से सशक्त होगी। शुरुआती चरण में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं समानांतर रूप से चलेंगी, ताकि लोगों को नई प्रणाली से जुड़ने में सुविधा हो। भविष्य में पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन किए जाने की योजना है। इस पहल से आमजन को न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि उन्हें न्यायालयों के चक्कर काटने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।

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