
संग्रहण केंद्र पर सड़ा करोड़ का धान पीसीसी चीफ दीपक बैज का बड़ा आरोप कहा प्रशासनिक लापरवाही से 1.46 लाख क्विंटल धान बर्बाद
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर से महज 10 किलोमीटर दूर नियानार में बनाया गया धान संग्रहण केंद्र इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। यहां अलग-अलग जिलों से यहां लाया गया धान करीब एक साल से खुले में पड़ा है, लेकिन अब तक इसका उठाव नहीं हो पाया है।नतीजा यह हुआ कि सैकड़ों क्विंटल धान सड़कर काला हो चुका है। इस गंभीर मामले को लल्लूराम डॉट कॉम ने उजागर किया, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सोमवार को नियानार धान संग्रहण केंद्र का हकीकत जानने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र में रखा पूरा धान पूरी तरह खराब हो चुका है। एक साल बीत जाने के बावजूद धान का उठाव नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि धान को बचाने के लिए जो पॉलिथीन बिछाई गई, वह भी घटिया गुणवत्ता की थी, जिससे बारिश और नमी से धान पूरी तरह खराब हो गया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 1 लाख 46 हजार क्विंटल धान को इस केंद्र में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने धान खरीदी से लेकर ट्रांसपोर्टिंग और संग्रहण केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। बैज ने कहा कि इसी भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए जानबूझकर धान को भिगोया गया और बाद में काली पॉलिथीन से ढंक दिया गया।संग्रहण केंद्र में अभी भी पड़ा है 15 हजार 129 मीट्रिक टन धान
दीपक बैज के अनुसार खुले आसमान के नीचे करीब 1000 करोड़ रुपये मूल्य का धान रखा गया था, लेकिन उसे सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। करीब 2 किलोमीटर के दायरे में फैले इस संग्रहण केंद्र में सड़ा हुआ धान अब बदबू और नुकसान की कहानी खुद बयां कर रहा है। वहीं, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नियानार संग्रहण केंद्र में अभी भी 15 हजार 129 मीट्रिक टन धान का उठाव बाकी है। इसके अलावा पूरे जिले में 27 हजार 307 मीट्रिक टन धान का उठाव शेष है, जिसकी अंतिम समय-सीमा 31 जनवरी 2026 तय की गई है।