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कौशाम्बी: दबंगों ने दलित परिवार की मेहनत पर पानी फेरा, ट्रैक्टर से रौंदी मिर्च और केले की फसल


खास खबर प्रकाशित -

क्या पुलिस की मिलीभगत से मनमानी कर रहे हैं दबंग?

कौशाम्बी में दलित किसान की फसल नष्ट करने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

जातिवाद की दरिंदगी: फसल बर्बाद, पुलिस बेपरवाह"

कौशाम्बी जिले के मंझनपुर ब्लॉक के सडवा गांव की निवासी रामरती (पत्नी कुंवारे लाल) एक अनुसूचित जाति (SC) परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनकी मेहनत और आजीविका का सहारा, खड़ी मिर्च और केले की फसल, गांव के कुछ दबंग लोगों की हिंसा और जातिवाद का शिकार हो गई।

दबंगों ने ट्रैक्टर चढ़ाकर जानबूझकर उनकी पूरी फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। जब रामरती न्याय की गुहार लेकर उनके घर पहुंचीं, तो उन्हें न सिर्फ डराया-धमकाया गया, बल्कि जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने की धमकी भी दी गई। आरोपियों में बृजमोहन प्रजापति, शिवलाल प्रजापति, मनजीत कुशवाहा, सुकरू राम, प्रकाश बाबू, शिवलाल, रामनथन, बबलू प्रजापति जैसे नाम शामिल हैं।

पुलिस की निष्क्रियता: पीड़िता ने इसकी शिकायत थाना सराय अकिल में दर्ज कराई, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की इस लापरवाही के बाद, पीड़िता को कौशाम्बी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से इंसाफ की गुहार लगाते हुए, आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी पड़ी।

गहराता संकट और व्यापक समस्या: यह घटना केवल संपत्ति नुकसान नहीं, बल्कि जातिगत उत्पीड़न और पुलिस व्यवस्था की विफलता का गंभीर मामला है। एक बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और नौकरशाही में जातिगत भेदभाव गहराई तक मौजूद है, जिससे दलित पीड़ितों को न्याय मिलने में अक्सर अड़चनें आती हैं। ऐसे में, रामरती का मामला एक सवाल खड़ा करता है: क्या प्रशासनिक तंत्र समाज के हर वर्ग को समान सुरक्षा देने में विफल है?

पीड़ित की मांग - तत्काल आवश्यक कार्रवाई:

1. पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।
2. एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सख्त धाराएं लगाई जानी चाहिए।
3. जिला प्रशासन को पीड़ित परिवार का तत्काल आर्थिक मुआवजा सुनिश्चित करना चाहिए।
4. पुलिस की निष्क्रियता पर भी उच्च स्तर पर जांच होनी चाहिए।

कौशाम्बी से ब्यूरो रिपोर्ट सुशील कुमार दिवाकर

मोबाईल नंबर - 7752873639

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