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राजनीतिक द्वेष या प्रशासनिक चूक कांडों में नामजदगी को लेकर खगड़िया में बवाल.. Live khabar Khagaria .. खगड़िया जिले में हाल ही में दर्ज दो अलग–अलग एफआ

राजनीतिक द्वेष या प्रशासनिक चूक कांडों में नामजदगी को लेकर खगड़िया में बवाल..
अनिल कुमार की रिपोर्ट
खगड़िया जिले में हाल ही में दर्ज दो अलग–अलग एफआईआर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। इन मामलों में कई चर्चित सामाजिक–राजनीतिक हस्तियों के साथ-साथ सामान्य नागरिकों के नाम शामिल किए जाने से विवाद गहराता जा रहा है। नगर परिषद खगड़िया के नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा, जिला परिषद सदस्य रजनीकांत कुमार, भाजपा जिला प्रवक्ता मनीष चौधरी तथा भाजपा नेता रविशंकर कुमार के नाम सामने आने के बाद इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि पुलिस द्वारा व्यक्ति-विशेष की भूमिका, उपस्थिति और साक्ष्यों की जांच किए बिना सामूहिक रूप से नामजदगी कर दी गई, जिससे कई निर्दोष लोग भी कानूनी पचड़े में फँस गए हैं।नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा के मामले में बताया जा रहा है कि उन्होंने घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक संवेदनशील और संयमित अपील साझा की थी। पोस्ट में न तो किसी पीड़िता का नाम, फोटो या वीडियो था और न ही कोई आपत्तिजनक टिप्पणी। बल्कि उन्होंने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी को सराहनीय बताया था। इसके बावजूद एफआईआर में उनका नाम जोड़े जाने से यह सवाल उठ रहा है कि जब सैकड़ों सोशल मीडिया यूजर, यूट्यूबर और डिजिटल न्यूज पोर्टल सक्रिय थे, तब कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक ही क्यों सीमित रही।वहीं जिला परिषद सदस्य रजनीकांत कुमार के संबंध में परिजनों का कहना है कि समाहरणालय परिसर में हुए हंगामा–उपद्रव के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। बताया गया कि अपर पुलिस अधीक्षक एवं गंगौर थाना प्रभारी के अनुरोध पर वे पीड़िता की माता को लेकर गंगौर थाना परिसर में उपस्थित थे। परिजनों का दावा है कि इसकी पुष्टि थाना परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पदाधिकारियों के बयान से की जा सकती है। इसके बावजूद उनका नाम चित्रगुप्त नगर थाना कांड में शामिल होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
भाजपा जिला प्रवक्ता मनीष चौधरी के परिजनों का कहना है कि घटना के समय वे घटनास्थल पर नहीं थे। वे खगड़िया मेन रोड स्थित आर्किटेक्ट शुभम की दादी के अंतिम संस्कार में शामिल थे और बाद में अपने ग्राम रहिमपुर में पंचायत स्तर की बैठक में उपस्थित रहे। उनका आरोप है कि बिना किसी ठोस साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शी या स्पष्ट भूमिका के उनका नाम भी कांड में जोड़ दिया गया।सबसे अहम दावा भाजपा नेता रविशंकर कुमार को लेकर सामने आया है। समर्थकों के अनुसार, घटना के दिन वे पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में माननीय उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मौजूद थे। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में दर्ज होना पुलिसिया जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दोनों एफआईआर में न केवल बड़े राजनीतिक नाम, बल्कि कई सामान्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं, जिनकी घटनाओं में कोई भूमिका नहीं बताई जा रही है। इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं दबाव या जल्दबाजी में सामूहिक नामजदगी तो नहीं कर दी गई।परिजनों एवं समर्थकों ने पुलिस प्रशासन से दोनों एफआईआर की निष्पक्ष, तथ्यपरक और व्यक्ति-आधारित जांच कराने की मांग की है। साथ ही निर्दोष लोगों के नाम कांडों से हटाने की भी अपील की गई है, ताकि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे। फिलहाल पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है, जबकि यह मामला जिले भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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