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किसान कल्याण वर्ष 2026 का शुभारंभ-अर्चना चिटनिस ने परंपरागत खेती, मृदा संरक्षण और प्राकृतिक कृषि को जनआंदोलन बनाने का किया आह्वान।

किसान कल्याण वर्ष 2026 का शुभारंभ-अर्चना चिटनिस ने परंपरागत खेती, मृदा संरक्षण और प्राकृतिक कृषि को जनआंदोलन बनाने का किया आह्वान।
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संवाददाता ✍️...
सादिक अख्तर
जिला बुरहानपुर, मध्यप्रदेश

बुरहानपुर। कृषि को आधुनिक तकनीक, परंपरागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी पहल पर वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस महाअभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। इसी तारतम्य में बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही। कार्यक्रम में श्रीमती चिटनिस ने ‘‘कृषि रथ‘‘ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा प्रशासनिक अधिकारियों एवं प्रगतिशील कृषकों से संवाद किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि कृषि केवल आजीविका नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की आत्मा है। परंपरागत खेती पद्धतियाँ पर्यावरण के अनुकूल थीं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती थीं। आज आवश्यकता है कि आधुनिक विज्ञान के साथ हम अपने पूर्वजों के ज्ञान और उस अनुभव को अपनाए। विदेशों से आए रासायनिक खाद को लौटाए पारंपरिक ज्ञान को पुनः अपनाकर टिकाऊ और लाभकारी खेती को बढ़ावा दे। श्रीमती चिटनिस ने मिट्टी की गिरती उर्वरता और उससे जुड़े स्वास्थ्य संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि रसायनों के अनियंत्रित और अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन (आर्गेनिक कार्बन) लगभग समाप्त हो रहा है, जिससे उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे निष्प्राण होती जा रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह भावी पीढि़यों के लिए गंभीर संकट बनेगा।
श्रीमती चिटनिस ने एक विचारणीय तथ्य रखते हुए कहा कि प्रकृति ने हमें वातावरण में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन मुफ्त उपलब्ध कराई है, फिर भी हम भारी धन खर्च कर रासायनिक नाइट्रोजन खरीद रहे हैं। केवल प्राकृतिक खेती ही वह सशक्त मार्ग है, जिससे मिट्टी की जैविक संरचना पुनर्जीवित होती है और भूमि स्वयं वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अवशोषित करने में सक्षम बनती है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने हर्बिसाइड, वीडिसाइड और पेस्टिसाइड जैसे घातक रसायनों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ये न केवल मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप कृषि को लाभ का धंधा बनाने और किसानों को आत्मनिर्भर करने हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए। इसी क्रम में जिले के किसानों को इस पद्धति से जोड़ने और जागरूक करने हेतु आगामी 15 दिनों का विशेष जागरूकता अभियान चलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत प्रशासनिक एवं कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव और खेत-खेत जाकर किसानों को रासायनिक कृषि के दुष्प्रभावों से अवगत कराएँगी तथा प्राकृतिक खेती की सरल तकनीकों का प्रशिक्षण देंगी।
कार्यक्रम में किसानों, जनप्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और जल संरक्षण के लिए संकल्प लिया। कार्यक्रम ने “किसान सशक्त-प्रदेश समृद्ध” के संदेश के साथ किसान कल्याण वर्ष 2026 को जन-जन तक पहुँचाने की मजबूत शुरुआत की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य किशोर पाटिल, दिलीप बेलदार, किशोर शाह, देवानंद पाटिल, विनोद कोली, कृषि विभाग के उपसंचालक मनोहर देवके, आशीष शुक्ला एवं आकाश चौधरी आदि गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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