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रिश्वत मामले में निलंबित अशोक शर्मा चार माह बाद बहाल, झालावाड़ नप आयुक्त लगाया

धौलपुर में रिश्वत मामले में एसीबी के राडार पर आने के बाद निलंबित तत्कालीन आयुक्त अशोक शर्मा को चार माह बाद ही बहाल करके स्वायत्त शासन विभाग ने झालावाड़ नगर परिषद आयुक्त के साथ झालरापाटन नगरपालिका ईओ का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। पर्व सीएम वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण नगरीय निकायों की जिम्मेदारी मिलने पर आयुक्त शर्मा ने बिना समय गंवाए 9 जनवरी को आदेश जारी होने पर उसी दिन ज्वॉइन भी कर लिया।
शर्मा पहले भी दो बार झालावाड़ नगर -परिषद में आयुक्त रह चुके हैं। यहां से स्थानांतरण बूंदी में परियोजना प्रबंधक के पद पर हुआ। कुछ िदन बाद धौलपुर स्थानांतरण हो गया। चार माह पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की भरतपुर टीम ने धौलपुर नगर-परिषद में ट्रेप कार्रवाई की थी। तब एईएन प्रिया झा सहित पांच जनों से रिश्वत के 3.10 लाख रुपए भी बरामद किए थे। आयुक्त शर्मा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए निलंबित कर दिया था। अब चार माह बाद बाहाल करके झालावाड़ में नियुक्ति सियासी चर्चा में है। दोनों नगरीय निकायों में भाजपा के बोर्ड हैं।
{संविदाकर्मी से आयुक्त तक विवाद : आयुक्त शर्मा का कार्यकाल हमेशा विवादों में रहा। संविदाकर्मी पैरा टीचर्स से नगर परिषद आयुक्त पद तक का सफर करने वाले अशोक शर्मा की लग्जरी लाइफ हमेशा चर्चा में रही। 24 अप्रैल 2002 को शर्मा ने सबसे पहले दौसा जिले में प्राथमिक शिक्षा कार्यालय में पैराटीचर पद के लिए आवेदन किया था। इसके बाद लगातार वे सरकारी कार्यालयों में उच्च पदों पर रहे। काफी समय झालावाड़ नगर परिषद में रहे।
Aima media jhalawar

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