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जौनपुर: मैटी इलेक्ट्रोहोमियोपैथी (इलेक्ट्रो होम्योपैथी) के आविष्कारक डॉ. काउंट सीजर मैटी की 217वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम मैटी इलेक्ट्रोहोमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, शाहगंज, जौनपुर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में चिकित्सक, छात्र और अनुयायी उपस्थित रहे।
डॉ. काउंट सीजर मैटी (जन्म: 11 जनवरी 1809, इटली) ने 19वीं शताब्दी में वनस्पतियों से बनी औषधियों के माध्यम से इलेक्ट्रोहोमियोपैथी नामक चिकित्सा पद्धति की स्थापना की, जो आज भी भारत सहित कई देशों में लोकप्रिय है। यह पद्धति वनस्पतियों की 'इलेक्ट्रिक' शक्ति पर आधारित बताई जाती है और इसे सरल, सुरक्षित एवं प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में जाना जाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. के. डी. त्रिपाठी ने सबसे पहले डॉ. मैटी के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी. पी. त्रिपाठी, डॉ. एन. पी. विश्वकर्मा, डॉ. बी. एन. यादव, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. रामरतन निषाद और डॉ. विपुल त्रिपाठी सहित अन्य गणमान्य चिकित्सक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
प्राचार्य डॉ. वी. पी. त्रिपाठी ने संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. मैटी का सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रोहोमियोपैथी के क्षेत्र में है, जो मानवता की सेवा के लिए समर्पित थी। उन्होंने कहा, "इलेक्ट्रोहोमियोपैथी औषधियों के माध्यम से जनसेवा करना ही डॉ. मैटी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।" उन्होंने उनके योगदान को इस क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए छात्रों और चिकित्सकों से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा डॉ. मैटी को श्रद्धांजलि अर्पित करने और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर इलेक्ट्रोहोमियोपैथी के प्रचार-प्रसार और जनसेवा के प्रति नई प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
यह कार्यक्रम न केवल डॉ. मैटी के जीवन और कार्यों को याद करने का माध्यम बना, बल्कि इलेक्ट्रोहोमियोपैथी जैसी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का संकल्प भी दोहराया गया।

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