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आर-पार की जंग: हरिके हेडवर्क्स पर 'रणभेरी', 11वें दिन 11 किसान भूख हड़ताल पर अन्नदाता का अल्टीमेटम: "हक की चिट्ठी मिलेगी, तभी मोर्चा हिलेगा; खोखले आश्

आर-पार की जंग: हरिके हेडवर्क्स पर 'रणभेरी', 11वें दिन 11 किसान भूख हड़ताल पर
​अन्नदाता का अल्टीमेटम: "हक की चिट्ठी मिलेगी, तभी मोर्चा हिलेगा; खोखले आश्वासनों का दौर खत्म"
​मल्लांवाला खास | 11 जनवरी (जोगिंदर सिंह खालसा) हरिके हेडवर्क्स की धरती आज किसानों के आक्रोश और संकल्प की गवाह बन गई है। 'बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष कमेटी' का पक्का मोर्चा आज 11वें दिन में प्रवेश कर गया। कड़ाके की ठंड और सरकार की बेरुखी के बीच, आज 11 किसानों ने अन्न का त्याग कर 'मरण व्रत' (भूख हड़ताल) का बिगुल फूंक दिया है। किसानों का साफ कहना है कि अब घर वापसी तभी होगी, जब सरकार कागजों पर समाधान की गारंटी देगी।
​रेत की चादर में दबे अरमान: "2025 की बाढ़ ने हमें सड़क पर ला दिया"
​मोर्चे का नेतृत्व कर रहे कमेटी के प्रधान सरदार जसबीर सिंह आहलूवालिया ने गरजते हुए कहा, "प्रशासन की फाइलें चल रही हैं, लेकिन किसान की सांसें अटक रही हैं। 2025 की प्रलयंकारी बाढ़ ने सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन को रेत के टीलों में बदल दिया। हम अपने ही खेतों में बेगाने हो गए हैं। अब सरकार के मौखिक दिलासों से पेट नहीं भरेगा।"
​11 सूत्रीय 'न्याय पत्र': ये हैं वो मांगें जिन पर अड़ा है मोर्चा
​संघर्ष कमेटी ने आर-पार की लड़ाई के लिए अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं:
​सिल्ट सफ़ाई का स्थायी हल: नदियों के तल में जमा मिट्टी की मुकम्मल सफाई हो ताकि भविष्य में बाढ़ का खतरा टले।
​कर्ज़ और मुआवज़ा: बर्बाद फसलों की विशेष गिरदावरी हो, तुरंत मुआवज़ा मिले और किसानों का कर्ज माफ किया जाए।
​चेक से भुगतान: ऑनलाइन पेमेंट में हो रही धांधली रोकने के लिए मुआवज़ा सीधे चेक के माध्यम से दिया जाए।
​रेत निकासी की मोहलत: खेतों में जमी रेत को हटाने के लिए समयसीमा बढ़ाई जाए, ताकि जमीन फिर से सोना उगल सके।
​बच्चों का भविष्य: बाढ़ पीड़ित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई के लिए विशेष आर्थिक पैकेज और डैम बोर्ड में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
​हुंकार: "जरूर जीतेंगे—संघर्ष जारी रखो"
​आहलूवालिया ने प्रदेश भर की सामाजिक, धार्मिक और किसान जत्थेबंदियों से इस धर्मयुद्ध में साथ देने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भुखमरी से बचाने की है।
​बड़ी बात: > किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें मानकर लिखित गारंटी नहीं दी जाती, तब तक न तो मोर्चा उठेगा और न ही भूख हड़ताल खत्म होगी। प्रशासन की चुप्पी ने आग में घी डालने का काम किया है।

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