
प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026 का भव्य समापन, साहित्य-संस्कृति और विमर्श की सशक्त छाप
समाचार:
जमशेदपुर। प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026 का समापन तीसरे दिन जिले के साहित्य प्रेमियों की उत्साहजनक उपस्थिति के बीच हुआ। समापन दिवस की शुरुआत दिशोम गुरु श्री शिबू सोरेन जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई, जिसमें उपायुक्त सहित जिले के साहित्यकार, लेखक और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
तीसरे दिन के प्रथम सत्र में लेखिका अनुकृति उपाध्याय से यदुवंश प्रणय की संवादात्मक बातचीत ने श्रोताओं को रचना प्रक्रिया, भाषा और स्मृति के गहरे अर्थों से परिचित कराया। अनुकृति ने अनुवाद की भूमिका, मानवीय सरोकारों की सार्वदेशिकता और पढ़ने की संस्कृति पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में साहित्यकार रणेंद्र ने महाश्वेता देवी की आदिवासी रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके लेखन ने आदिवासी संघर्षों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्होंने युवाओं से महाश्वेता देवी की रचनाएं पढ़ने का आह्वान किया।
तीसरे सत्र ‘एक जंगल हुआ करता था’ में पक्षी विज्ञानी विक्रम ग्रेवाल और रजा काजमी ने घटते जंगल, पर्यावरण संरक्षण और झारखंड के वन आधारित साहित्य की विरासत पर सार्थक चर्चा की। उन्होंने इको-टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
चौथे सत्र में झारखंड की नई पीढ़ी को मंच दिया गया, जहां बच्चों और युवाओं ने अपने विचार, सपने और उपलब्धियां साझा कीं। यह सत्र भविष्य के प्रति आशा और विश्वास का प्रतीक बना।
पांचवें सत्र में साहित्य और सिनेमा के संबंध पर चर्चा हुई। डॉ. नेहा तिवारी और फिल्म निर्माता निरंजन कुजूर ने आदिवासी सिनेमा, उसके यथार्थ चित्रण और क्षेत्रीय फिल्मों को प्रोत्साहन की जरूरत पर बल दिया।
छठे सत्र में पत्रकार-लेखक राहुल पंडिता ने संघर्ष क्षेत्रों की पत्रकारिता, स्मृति और इतिहास के संबंध पर विचार रखे।
इस अवसर पर शिक्षक अरविंद तिवारी की पुस्तक “स्कूल में जेंडर” का विमोचन भी किया गया।
अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम अर्नव मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ साहित्य उत्सव का औपचारिक समापन हुआ। इसके पश्चात सांस्कृतिक संध्या में झारखंड की कला, नृत्य, नाटक और संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।
— आनंद किशोर
ब्यूरो चीफ, अखंड भारत न्यूज़
ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन