
दुर्गति से बचने का प्रयास करे मानव : मानवता के मसीहा महाश्रमण
13 कि.मी. का विहार कर युगप्रधान आचार्यश्री पहुंचे रूपनगढ़
स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय पूज्यचरणों से बना पावन
रविवार, रूपनगढ़, अजमेर (राजस्थान) जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी वर्तमान में समय में अपनी धवल सेना के साथ अजमेर जिले की सीमा में गतिमान हैं। आचार्यश्री की आध्यात्मिक आलोक पूरा क्षेत्र आलोकित हो रहा है।
रविवार को प्रातःकाल की मंगल बेला में शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने रलावता से मंगल प्रस्थान किया। कड़कड़ाती ठण्ड में लोग जहां प्रातः जल्दी से अपने घरों अथवा कर्म कपड़ों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं, वैसे इस सर्द मौसम में भी मानवता के मसीहा मानवता का शंखनाद करते हुए निरंतर गतिमान है। आचार्यश्री वर्ष 2026 का वर्धमान महोत्सव बोरावड़ में घोषित कर रखा है तथा इस वर्ष मर्यादा महोत्सव छोटू खाटू में समायोजित है। वर्तमान में आचार्यश्री दिन-प्रतिदिन बोरावड़ के निकट होते जा रहे हैं। आज भी मार्ग में अनेकानेक श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य करीब 13 किलोमीटर का विहार कर रूपनगढ़ में स्थित स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में पधारे।
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने महाविद्यालय परिसर में ही समायोजित मुख्य मंगल प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि इस संसार में जन्म-मरण की परंपरा चलती है। प्राणी एक दिन जन्म लेता है, जीवन जीता है और एक दिन मृत्यु को भी प्राप्त हो जाता है। यह स्थिति केवल मनुष्य की ही नहीं, अपितु सभी प्राणियों की स्थिति होती है। यह संसार जन्म-मरण की परंपरा वाला है। आदमी को यह विचार करना चाहिए कि वह इस जन्म के बाद भी दुर्गति में न जाए, ऐसा प्रयास करना चाहिए और कभी उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। जीवन का अंतिम लक्ष्य तो मोक्ष की प्राप्ति ही होनी चाहिए। पूर्व कर्मों का क्षय हो जाए और पूर्णतया कर्ममुक्ति की स्थिति प्राप्त हो जाए।
संसारी जीवों का जीवन नश्वर होता है, एक दिन समाप्त होने वाला है। इन सभी प्राणियों में मनुष्य जीवन प्राप्त करना दुर्लभ बात होती है। मानव जीवन से ही साधना करके मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए आदमी को इस जीवन में क्या करना है और क्या नहीं करना, इसका विवेक रखने का प्रयास होना चाहिए। आदमी को वर्तमान जीवन में अच्छी अनुकूलता मिली है, उसे पूर्व जन्म की पुण्याई का लाभ मान लिया जाए तो आदमी को वर्तमान जीवन को भी अच्छा बनने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को बुरे कार्यों से बचने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपने जीवन में अहिंसा, संयम, ईमानदारी और नैतिकता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ त्याग, तपस्या, साधना आदि का बल होगा तो आगे का जीवन भी अच्छा हो सकता है।
रूपनगढ़ की ओर से श्री संजय जैन, स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय के डायरेक्टर बीएल देवानंदा तथा प्रिंसिपल श्रीमती रानू वासानी ने अपनी श्रद्धासिक्त अभिव्यक्ति दी व मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।