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चीन से उड़ा रंगीन सपना: पतंगों का इतिहास, संस्कृति और रिकॉर्ड्स की उड़ान

हर त्योहार की अपनी एक अलग पहचान होती है। होली रंगों से, दीपावली रोशनी से, ईद सेवइयों की मिठास से और क्रिसमस केक की खुशबू से पहचानी जाती है। ठीक इसी तरह नए वर्ष का पहला बड़ा पर्व मकर संक्रांति पतंगों के रंगीन आकाश से अपनी पहचान बनाता है। इस दिन बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी खुले आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाते नजर आते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हवा में लहराती यह कागजी पतंग कितनी पुरानी है और इसका इतिहास कितना रोचक है?
पतंग की उत्पत्ति: चीन से हुई शुरुआत
पतंग का इतिहास लगभग 2,000 से 3,000 वर्ष पुराना माना जाता है। इसकी उत्पत्ति प्राचीन चीन में वारिंग स्टेट्स पीरियड (475–221 ईसा पूर्व) के दौरान हुई। इतिहासकारों के अनुसार, दार्शनिक मोजी और शिल्पकार लू बान ने पहली पतंग बनाई थी। शुरुआती पतंगें लकड़ी से बनी होती थीं और पक्षियों की आकृति में तैयार की जाती थीं।
चीन के शैंडोंग प्रांत का वेईफांग शहर आज भी ‘पतंगों की राजधानी’ कहलाता है। 549 ईसा पूर्व के आसपास कागज की पतंगें अस्तित्व में आईं, जिनका उपयोग सैन्य संदेश भेजने और दुश्मन की स्थिति जानने के लिए किया जाता था।
रेशम, बांस और कागज जैसी हल्की सामग्रियों ने पतंग निर्माण को आसान बना दिया। 12वीं शताब्दी तक यह कला पश्चिमी देशों तक पहुंच गई, जहां पतंगें मनोरंजन और वैज्ञानिक प्रयोगों का साधन बनीं।
भारत में पतंगों का आगमन
भारत में पतंग लाने का श्रेय चीनी यात्रियों फा-हिएन और ह्वेन त्सांग को दिया जाता है। यहां पतंगों को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मिली। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना शुभ माना गया।
19वीं और 20वीं शताब्दी में पतंगों का वैज्ञानिक उपयोग भी हुआ। अमेरिका के मौसम विभाग ने कई वर्षों तक पतंगों के माध्यम से हवा की गति, तापमान और मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र किए।
मकर संक्रांति और पतंगबाजी
मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होता है, जिसे शुभ परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है, जहां छतों पर ‘काट… काट…’ की गूंज सुनाई देती है। मान्यता है कि पतंग उड़ाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।
जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में अंतरराष्ट्रीय काइट फेस्टिवल आयोजित होते हैं, जहां दुनियाभर से पतंग प्रेमी भाग लेते हैं।
दुनिया भर में पतंग उत्सव
पतंग केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।
ऑस्ट्रेलिया: बॉन्डी बीच पर फेस्टिवल ऑफ द विंड्स
चीन: वेईफांग इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल
जापान: हमामात्सु काइट फेस्टिवल
इंडोनेशिया: बाली काइट फेस्टिवल
इटली और डेनमार्क: कला और विशाल पतंगों के लिए प्रसिद्ध
ये उत्सव सांस्कृतिक एकता और रचनात्मकता का प्रतीक हैं।
करोड़ों का पतंग उद्योग
पतंग उद्योग आज करोड़ों रुपये का कारोबार करता है। भारत में बरेली, अलीगढ़, रामपुर, मुरादाबाद, लखनऊ और अहमदाबाद प्रमुख केंद्र हैं। वहीं चीन का वेईफांग शहर विश्व का सबसे बड़ा निर्यात केंद्र माना जाता है।
पतंगों के विश्व रिकॉर्ड
पतंगबाजी ने कई अद्भुत विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं—
कुवैत में दुनिया की सबसे बड़ी पतंग उड़ाई गई।
चीन में एक डोर से 43 पतंगें उड़ाने का रिकॉर्ड।
गाजा में 12,350 पतंगें एक साथ उड़ाई गईं।
ऑस्ट्रेलिया में 4,900 मीटर ऊंचाई तक पतंग उड़ाई गई।
निष्कर्ष
पतंग केवल कागज और डोर का खेल नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और भावनाओं की उड़ान है। चीन से शुरू हुई यह परंपरा आज पूरी दुनिया को रंगीन आकाश के नीचे जोड़ती है।
जब भी आप अगली बार पतंग उड़ाएं, तो याद रखिएगा कि आपके हाथ में सिर्फ एक डोर नहीं, बल्कि हजारों वर्षों का इतिहास बंधा हुआ है।

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