
दर- दर भटक रही है इटावा की महिला नहीं मिल पा रहा है न्याय
रीना पत्नी राजेन्द्र कुमार हाल, निवासी लालपुरा, थाना कोतवाली, जनपद इटावा, एक शांतिप्रिय, कानून का सम्मान करने वाली महिला है, जो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है।
प्रार्थिनी के विरुद्ध कुछ नामित/अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत लगातार मानसिक, सामाजिक एवं डिजिटल माध्यमों से उत्पीड़न किया जा रहा है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, कॉल, संदेश तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों का दुरुपयोग कर—
जान से व सामाजिक प्रतिष्ठा से संबंधित आपराधिक धमकियाँ देना,
झूठे आरोप व अफवाहें फैलाकर महिला की छवि धूमिल करना,
मानसिक दबाव बनाकर डराने-धमकाने का प्रयास करना,
महिला को न्यायिक/कानूनी कार्यवाही से रोकने हेतु न्याय में बाधा उत्पन्न करना,
तथा पूरे प्रकरण को प्रभावित करने हेतु डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका
जैसे गंभीर आपराधिक कृत्य लगातार किए जा रहे हैं।
उपरोक्त कृत्य स्पष्ट रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं, जिनमें विशेष रूप से—
डिजिटल पहचान व सूचना का दुरुपयोग,
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी/छल,
महिला के विरुद्ध मानसिक क्रूरता व उत्पीड़न,
आपराधिक षड्यंत्र,
आपराधिक धमकी,
न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप
जैसी गंभीर धाराएँ लागू होती हैं।
यह अत्यंत चिंताजनक व दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने स्पष्ट तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं महिला सुरक्षा से जुड़े मामले के बावजूद अब तक प्रभावी पुलिस कार्यवाही नहीं की गई। यह स्थिति न केवल महिला रीना की सुरक्षा, गरिमा एवं जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) एवं 21 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं BNS की सभी सुसंगत धाराओं में निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
महिला रीना को तत्काल पुलिस सुरक्षा एवं कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए।
प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए।
यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाए, तो उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध भी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
यह प्रकरण केवल एक महिला का नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा, मानवाधिकार एवं कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। किसी भी स्तर पर की गई देरी, उदासीनता या संरक्षणात्मक रवैया संवैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन माना जाएगा