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7 महीने से विभाग और अफसर सोए कुम्भकरणी नींद l लोगों के लिए सीवरेज एवं गली की व्यवस्था बदहाल

मौसम बदले, साल बदला… पर सुभाष नगर नरवाना की बदहाली नहीं बदली
7 महीने से सीवरेज और गली निर्माण का नरक, सरकार और विभाग मौन
नरवाना (जींद)।
मौसम बदले, साल बदला, सरकारें बदलीं, लेकिन सुभाष नगर नरवाना के लोगों की किस्मत नहीं बदली। जून 2025 में शुरू हुआ गली और सीवरेज निर्माण कार्य आज जनवरी 2026 में भी लोगों के लिए अभिशाप बना हुआ है। सात महीने बीत जाने के बाद भी न तो सीवरेज का काम पूरा हुआ और न ही टूटी गलियों की सुध ली गई।
सीवरेज खुदाई के दौरान दर्जनों घरों की पेयजल पाइपलाइन तोड़ दी गई। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के कारण उन्हें अपने घरों में पीने का पानी तक अपनी जेब से ठीक करवाना पड़ा। बार-बार शिकायतें देने के बावजूद विभाग ने सीवरेज का काम बीच में अधूरा छोड़ दिया है और ठेकेदार ने जितने काम का कॉन्ट्रैक्ट लिया उसे पूरा नहीं किया गया इस बारे मंत्री रणबीर सिंह गंगवा को भी अवगत करवाया गया है l
स्थानीय लोगों ने EIC दहिया को लिखित शिकायत दी, विभागीय मंत्री रणबीर गंगवा को कई बार अवगत कराया, और क्षेत्र के कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी से भी आमने-सामने मिलकर अपनी पीड़ा बताई। इसके बावजूद सात महीने बाद भी सुभाष नगर की गलियां कीचड़, पानी और गड्ढों में तब्दील हैं। सवाल यह है कि क्या जनता की परेशानी सिर्फ चुनाव तक ही मायने रखती है?
लोगों का आरोप है कि जब XEN साहब को मौके पर आकर स्थिति देखने को कहा गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “यह मेरा काम नहीं है, यह SDO का काम है।” विभागीय अधिकारियों की यह बयानबाज़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का जीता-जागता उदाहरण है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि ठेकेदार ने निर्धारित सीवरेज पाइप की जगह घटिया गुणवत्ता के प्लास्टिक पाइप लगा दिए। इस गड़बड़ी की जानकारी कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी को भी दी गई, लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी न जांच हुई, न कोई एफआईआर, और न ही ठेकेदार पर कोई कार्रवाई। क्या यह लापरवाही है या संरक्षण?
चौंकाने वाली बात यह है कि सुभाष नगर इलाका कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के निवास से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। मंत्री के घर के पास की कॉलोनी का यह हाल है, तो नरवाना के बाकी इलाकों की स्थिति की कल्पना करना मुश्किल नहीं।
पूर्व फौजी शमशेर सिंह, सुरेश राठी, बलजीत सिंह, मास्टर सेवा सिंह, होशियार सिंह नैन, फौजी सतबीर सिंह, प्रेम चंद वर्मा सहित सुभाष नगर के करीब 25 नागरिक बार-बार विभाग और सरकार के दरवाज़े खटखटा चुके हैं। लेकिन लोगों का आरोप है कि सरकार केवल वोट लेना जानती है, जनता से किए वादों को निभाना नहीं।
सात महीने बाद भी सरकार और विभाग कुम्भकरणी नींद में सोए हुए हैं। अब सुभाष नगर के लोग पूछ रहे हैं—
क्या अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या घटिया निर्माण की जांच होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हुई तथा पेयजल व सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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