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विश्व हिंदी दिवस: वैश्विक क्षितिज पर बढ़ते कदम

"जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता।"
— *भारतेंदु हरिश्चंद्र (आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह)*

हर साल 10 जनवरी को मनाया जाने वाला 'विश्व हिंदी दिवस' केवल एक तिथि नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैले करोड़ों हिंदी प्रेमियों के जुड़ाव का उत्सव है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना और इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है।

विश्व हिंदी दिवस की जड़ें 10 जनवरी 1975 में नागपुर में हुए पहले 'विश्व हिंदी सम्मेलन' से जुड़ी हैं। इस ऐतिहासिक दिन की याद में और हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने के संकल्प के साथ, साल 2006 से औपचारिक रूप से इसे हर साल मनाया जाने लगा। आज संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर विदेशी विश्वविद्यालयों तक, हिंदी की गूँज सुनाई दे रही है।

हिंदी की बदलती तस्वीर :

आज के दौर में हिंदी सिर्फ साहित्य और संवेदना की भाषा नहीं रही, बल्कि यह "बाजार और तकनीक की भाषा" भी बन चुकी है।

1. इंटरनेट पर दबदबा:-डिजिटल माध्यमों पर हिंदी कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ी है।
2. आर्थिक महत्व:-दुनिया की बड़ी कंपनियां अब भारतीय बाजार तक पहुँचने के लिए हिंदी का सहारा ले रही हैं।
3. सांस्कृतिक राजदूत:- बॉलीवुड, योग और भारतीय दर्शन ने हिंदी को सात समंदर पार घर-घर पहुँचाया है।

हिंदी दिवस मनाने की सार्थकता तभी है जब हम अपनी बोलचाल और लेखन में इसे गरिमा प्रदान करें। हमें हिंदी को 'हीन भावना' से निकालकर 'गर्व की भाषा' बनाना होगा।

हिंदी हमारे भावों की अभिव्यक्ति है, हमारी जड़ों की पहचान है। आइए, इस विश्व हिंदी दिवस पर हम संकल्प लें कि हम न केवल हिंदी बोलेंगे, बल्कि इसे आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जोड़ने में भी अपना योगदान देंगे।

**जय हिंद, जय हिंदी!**

मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT

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