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सत्ता नहीं, संकल्प की जीत: 'पिंकी फाउंडेशन' से बदल रही चिरकुंडा की तस्वीर:

विशेष रिपोर्ट, चिरकुंडा:
चिरकुंडा में जहां चुनावी वादे खोखले साबित हुए और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने जनता को निराश किया, वहीं 'पिंकी फाउंडेशन' विकास की एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। फाउंडेशन ने यह साबित कर दिया है कि समाज सेवा के लिए राजनीतिक कुर्सी की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है।
जहाँ चुनाव के बाद विकास के वादे हवा हो गए और चुने हुए प्रतिनिधियों ने जनता को निराश किया, वहीं चिरकुंडा में 'पिंकी फाउंडेशन' उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है। फाउंडेशन ने साबित कर दिया है कि विकास के लिए कुर्सी नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है।बिना सत्ता के विकास: पिंकी फाउंडेशन ने बिना किसी राजनीतिक पद के चिरकुंडा को एक 'आदर्श' (Idol Place) बनाने का संकल्प लिया है। यह उन लोगों के लिए एक जवाब है जो मानते हैं कि बदलाव केवल सत्ता से ही संभव है। सत्ता में आए बिना और राजनीतिक नेता बने बिना उसने यह यह काम कर दिखाया कि चिरकुंडा के 21 वार्डों में अभियान चलाकर अब तक 20-25 जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया है। यह कदम न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि समाज में उनकी स्थिति को भी मजबूत कर रहा है।

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