
बीसलपुर तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप,
लेखपाल की भूमिका संदिग्ध
संवाददाता पीलीभीत
पीलीभीत/बीसलपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम कनपरी से सामने आया यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस तरह सरकारी तंत्र दबंगों के आगे नतमस्तक होता जा रहा है।
आरोप है कि लेखपाल ने मोटी रिश्वत लेकर पारम्परिक तालाब और चकरोड की सरकारी भूमि दबंगों के हवाले कर दी, जिस पर अब खुलेआम अवैध निर्माण कराया जा रहा है।अभिलेखों के अनुसार दबंगों के नाम लगभग 12 बीघा भूमि दर्ज है, लेकिन जब तहसील प्रशासन द्वारा पैमाइश कराई गई तो कब्जा 14 बीघा निकला।नियमों के तहत जहाँ 2 बीघा अतिरिक्त भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाना चाहिए था, वहीं लेखपाल ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय उसी अवैध भूमि पर आवास निर्माण की अनुमति दे दी—जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।यह मामला केवल एक लेखपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।यदि तालाब और चकरोड जैसी सार्वजनिक संपत्तियाँ ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम ग्रामीण किससे न्याय की उम्मीद करे?अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?जनता की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।