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राजूपुर कुंडरी की गौशाला में प्रधान पति की दबंगई!भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप, अधिकारी बने मौन दर्शक




पीलीभीत/बीसलपुर ग्राम राजुपुर कुंडरी की गौशाला को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार गौवंश संरक्षण और गौशालाओं की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और दबंगई की तस्वीरें इन योजनाओं की साख पर सवाल खड़े कर रही हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के पति ने गौशाला पर पूरी तरह कब्जा जमा रखा है। गौशाला के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं दी जा रही। जब कुछ ग्रामीण और स्थानीय पत्रकार स्थिति देखने पहुंचे, तो प्रधान पति ने उन्हें जबरन रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि “अंदर जाने पर अधिकारियों ने रोक लगा रखी है”, लेकिन जब यह बात क्षेत्रीय बीडीओ से पूछी गई तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई आदेश मौजूद नहीं है।जांच में यह भी सामने आया कि गौशाला की देखरेख में लगे कर्मचारी प्रधान पति के इशारे पर मनमानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में रखी चारे और मवेशियों की स्थिति दयनीय है, जबकि रिकॉर्ड में सब कुछ “सही” दिखाया जा रहा है।गांव के कुछ लोगों ने यह भी बताया कि इसी प्रधान पति पर पहले “मगरमच्छ मारने के मामले के दौरान चर्चा में रह चुके हैं लोगों का कहना है क्या पता हिंदुओं की गौ माता से ले रहे हैं यह बदला लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसका नतीजा यह है कि अब वही व्यक्ति खुलेआम सरकारी व्यवस्था को चुनौती देता नजर आ रहा है।जब पत्रकारों ने शासन-प्रशासन से जवाब मांगा तो अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे। और ग्राम पंचायत अधिकारी श्री नूरुददीन से बात की गई तो उन्होंने कहा मामला यहीं पर खत्म कर दो पहले भी चर्चा में रह चुका है मामला। बीडीओ से लेकर पशु अधिकारी तक किसी ने भी स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। इससे सवाल उठता है कि आखिर ऐसी कौन सी सच्चाई गौशाला के भीतर छिपाई जा रही है, जिससे जनता को दूर रखा जा रहा है?स्थानीय नागरिकों की मांग है कि शासन इस पूरे मामले में स्वतंत्र जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठ न जाए।संपादकीय टिप्पणी:
राजुपुर कुदरी का यह मामला केवल एक गांव या एक गौशाला तक सीमित नहीं है। यह उस भ्रष्ट तंत्र का प्रतीक है, जहां कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी योजनाओं को अपने निजी हितों का साधन बना लेते हैं। अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो ऐसी घटनाएं जनविश्वास को गहरा धक्का पहुंचाएंगी।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गौशाला में रखी गई कई गायें रोजाना दम तोड़ रही हैं और मृत पशुओं को खुले में फेंक दिया जाता है। कुत्तों और कौवों द्वारा मृत गायों को नोचने के वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है।गौरतलब है कि संबंधित प्रधान पति पर इससे पहले भी वन विभाग की कार्रवाई के दौरान विवादित मामले दर्ज हो चुके हैं। अब वही व्यक्ति गौशाला प्रबंधन में मनमानी कर रहा है, जबकि अधिकारी मौके की वास्तविक स्थिति से उच्चाधिकारियों को गलत रिपोर्ट देकर गुमराह करते दिखाई दे रहे हैं।

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