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युवा बेटे ने शहर पर आधारित बनाया दोहा...

मनेन्द्रगढ़/ एम.सी.बी जिले के अंतर्गत आने वाले मनेंद्रगढ़ के मौहारपारा वार्ड क्र05 निवासी एक युवा पत्रकार श्री यीशै दास ने मनेंद्रगढ़ शहर से लगे आस- पास के पर्यटन स्थल सहित धाम , रेलवे स्टेशन , त्यौहार,सहित आपसी सद्भाव को दर्शाते हुए। प्रेम और भाईचारे का संदेश देने का अथक प्रयास करते हुए एक पंक्ति माध्यम दोहा दर्शा शहर की गाथा को बताने की कोशिश की गई है।साथ ही व्यापार सहित अन्य को लेकर एक ही स्वर में उक्त पंक्ति को जोड़कर लेख किया गया है।जिसका लेखन स्वयं यीशै दास ने अपने सोच से निखारा है ।जो अब तक शायद किसी ने बनाया ही नहीं होगा जो इन दिनों चर्चा का विषय बनता जा रहा है ‌।

जिसके पीछे की वजह यह है ।कि एक बेहद कम उम्र में अपनी अमठ पहचान स्थापित करने वाले शहर के उभरते युवा यीशै दास जिनकी सोच सिर्फ और सिर्फ मनेंद्रगढ़ शहर को आगे बढ़ाने और पहचान दिलाने की है।

और वहीं क्रम में श्री -दास द्वारा लिखे गए उक्त शीर्षक की पंक्ति जो -इस प्रकार है।कि - यह एक मनेंद्रगढ़ शहर है, जो चारों ओर पहाड़ों के घने फिजाओं में घिरा हुआ है , जहां की गलियों में सभी के बचपन की यादें भी है।कुछ दबी, जंगलों में छुपी हर प्रकार की मिलती औषधी - आयुर्वेद दवाईयां है।हां ये  मनेंद्रगढ़ शहर है, ।ये मनेंद्रगढ़ शहर है।

जहां कि सड़कें भी हैं ।बड़े ही घुमावदार रास्ते तो कहीं मिट्टी की खुशबूए है। महकती, जहां आज भी है ।पुरानी परम्परा जीवित , जहां के पर्यटक स्थल भी है।बड़े महान ,नहीं कोई गाथा मेरी ,खुद ही मेरी पहचान है।जहां सिद्ध बाबा है ।साक्षात विराजमान, जहां से मिलता सभी को आशीर्वाद है। अपने परम्परागत भारतीय मूल संस्कृति को अपनाने वाला है ,शहर अपना , हां ये मनेंद्रगढ़ शहर है। ,

जहां सभी- त्यौहारों को मनाया जाता बड़े ही धूमधाम से है। और रहते साथ हैं। हिंदु मुस्लिम, सिख, ईसाई नहीं किसी में कोई बैर है।सभी करते एक - दुसरे के त्यौहारों में सहयोग है, व्यापारीयो का है,केंद्र बिंदु और व्यवसाईयो के व्यापार का अधार  ,पक्की सड़क से लेकर पगडंडी रास्तों का है ।ये शहर अपना।जहां सभी- को है,अधिकार, और व्यापार भी करते हैं। सभी बड़े  प्यार से  है ।फक्र मुझे कि, मनेंद्रगढ़ शहर इन हसिन वादियों में कभी होती है , सर्द हवाओं की रूख है। तो कभी गर्मी, फिर बरसात है। फिर भी यह एक मनेंद्रगढ़ शहर है ,हां ये मनेंद्रगढ़ शहर है।

पहाड़ है , नदिया ,झील है,और हैं, हरियाली भी बेशुमार,नदियों से होता जहां निस्तार है, हसदेव तट की अम्रत धारोहर भी है। बड़ी महान ,हां ये मनेंद्रगढ़ शहर है,।

मिठी बोली यहां कि- विनम्र व्यवहार है। मक्खन से लोग यहां के पर ढेडो के लिए तलवार है। यहां है, बुद्ध जीवीयो की भरमार है,भोले के लिए भोले लोग जहां खुली विचारधारा है,सभी की ये पहचान है ।,जहां लोग कभी मिलते फुर्सत के पल इन ठंडी हवाओं में चाय की दुकानों पर और बिताते हैं ,कुछ पल , है एक छोटा जंक्शन बौरीडाड जो हरियाली के वादियों में सिमटा हुआ है ।। हां ये ऐसा मनेंद्रगढ़ शहर है ,,

निकलता छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जिले से है।जिसका नाम भी है ,बडा निराला मनेंद्रगढ़ - चिरमिरी -भरतपुर है ।जिला- अपना जहां सभी करते एक - दुसरे की है ।मदद है ,चाहे फिर कितने  ही हो मतभेद हैं।यहां के खेल भी है ।बड़े निराले कभी क्रिकेट तो कभी फुटबाल होते हैं। मैच सारे ,कोई करता रोजगार है।तो कोई करता व्यापार है।लेकिन यहां सभी को मिलता सम्मान है। शहर मनेंद्रगढ़ है। ऐसा खास जहां कभी देखते लोग है। मूवी है ,तो कभी मनाते पिकनिक‌ करमघोघा,अमृतधारा ,सिरौली धाम है। जहां के पर्यटन स्थल भी महान है ,  

है- मनेंद्रगढ़ में एक छोटा स्टेशन, जो करता सभी के रास्तों को आसान है, जहां लगता मकर संक्रांति मेला है ।नहीं रखता किसी से बैर है , न करता , नफरत फिर भी एक मनेंद्रगढ़ शहर है, फिर भी एक मनेंद्रगढ़ शहर है।

बना एक नया पुल है ,जहां से सभी की मंजिलें होती है ,आसान ,विकसित होता मनेंद्रगढ़ शहर है । मिलती एक नई पहचान है ।जिसमें सभी का अहम योगदान है ।जोडता गांवों और कस्बों को देता सभी का साथ है।,हां ये मनेंद्रगढ़ शहर है,,

मिलती है, सब्जियां और फल मिलती दवाईयां आसान है,
चलती शासन की योजना भी यहां की बड़ी महान है।वन
परिक्षेत्र आबादी वाला शहर अपना ,कोयले की खान भी बेशुमार जोड़ता कोयलांचल क्षेत्रों को देता नई पहचान है।

कोई चलाता गाडियां हैं,तो कोई चलाता व्यापार है,कोई करता किसानी मगर सभी का शहर में रहता सम्मान है ।हार नहीं मानूंगा बनाउंगा, अपनी अलग पहचान ,हां मैं मनेंद्रगढ़ शहर हूं।

चुनावों में मचता यहां घमासान है। फिर भी मेरी अमठ पहचान है, फिर भी मेरी अमठ पहचान है।

युवाओं को देता अलग-अलग आधार हूं, कोई करता राजनिति तो कोई करता रोजगार है ,रहता बड़ा ही खामोश हूं , रहता बड़ा शांत ,चिड़ियो की चहचहाहट मिलती सुबह -शाम है ।हां ये मनेंद्रगढ़ शहर है ,,

मैं कोई सुविचार नहीं बनाता हूं, । सिर्फ शहर की गाथा को बताता हूं ,गढ़ता एक नया विकसित शहर अपना , सिर्फ पहचान मेरी मनेंद्रगढ़ की सरजमीं से,मैं कोई पंक्ति नहीं बनाता हूं,कोई सुविचार नहीं गढ़ता हूं ,है मेरे शहर के युवाओं में जोश विचार नहीं प्रगट करता हूं,हर तूफानी कलाओं की बनता पहचान हूं ,  गिरूंगा फिर बढूंगा आगे ,हार नहीं मानूंगा,हार नहीं मानूंगा , अंतिम कड़ी में श्री दास-  ने मिडिया को जानकारी देकर बताया कि - मैं इसी शहर में अपना जीवन और उम्र बिताते हुए यही पढ़ा ,बढ़ा ,और आगे बढ़ने कुछ करने की मंशा को लेकर और अपने उम्र के युवाओं को आधार मानकर मैने एक छोटा सा प्रयास किया है । निश्चित ही निरंतर आगे ऐसा भी मेरा प्रयास सतत् रूप में शहर वासियों के आशीर्वाद और शुभकामनाओं से जारी रहेगा । जानकारी साझा किया गया ।

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