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शराब पर प्रशासन की पकड़ ढीली अवैध कारोबार पर सत्तारूढ़ के विधायक ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने कषातंज

जगदलपुर। बस्तर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने छत्तीसगढ़ में अवैध शराब के खिलाफ सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात ये है कि अवैध शराब को लेकर आरोप विपक्ष नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायक खुद लगा रहे हैं।विधायक का कहना है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग मौन है।

बस्तर जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला इसलिए अहम है, क्योंकि चित्रकोट विधानसभा के भाजपा विधायक विनायक गोयल ने खुले तौर पर अपने ही सरकार के सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। विधायक का कहना है कि उनकी विधानसभा के गांव-गांव में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की अंग्रेजी शराब धड़ल्ले से बेची जा रही है। यह बिक्री न केवल ढाबों और गुमटियों में हो रही है, बल्कि छोटे-छोटे अवैध ठिकाने भी सक्रिय हैं।

विनायक गोयल के मुताबिक, इस अवैध शराब का सीधा असर युवाओं पर पड़ रहा है। नशे की लत से पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हैं और सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय थानों और आबकारी अधिकारियों को कई बार दी गई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही नहीं, विधायक ने शराब कोचियों, दुकानदारों और ढाबा संचालकों के साथ-साथ पुलिस व आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। अब उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जिले के कलेक्टर, एसपी और आईजी से करने की बात कही है, साथ ही लापरवाह थानेदारों पर कार्रवाई की मांग भी की है।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए तंज कसा है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य का कहना है कि एक ओर पूर्व मंत्री कवासी लखमा को कथित शराब घोटाले में जेल भेजा गया, वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक खुद अवैध शराब की बिक्री की पोल खोल रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि पूरे प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है और सरकार इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। हालात ऐसे हैं कि अब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों को ही अपने ही प्रशासन से गुहार लगानी पड़ रही है। भाजपा सरकार खुद को ईमानदार बताती है, लेकिन उनके विधायक ही अवैध शराब की बिक्री उजागर कर रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार की नीयत और सिस्टम दोनों फेल हैं।

अब सवाल ये है कि जब सत्तारूढ़ दल के विधायक ही प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, तो अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कब और कैसे होगी? क्या शिकायतों के बाद सिस्टम हरकत में आएगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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