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केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा देश में जनगणना–2027 के कार्यक्रम की घोषणा के बाद, गुजरात इंसाफ मंच (NGO) के Founder & President, Shaikh Abdul Samad

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा देश में जनगणना–2027 के कार्यक्रम की घोषणा के बाद, गुजरात इंसाफ मंच (NGO) के Founder & President, Shaikh Abdul Samad ने इस प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं हैं।

Shaikh Abdul Samad ने कहा कि जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2027 के बीच शुरू होना है, जिसमें घरों की लिस्टिंग और घरों से संबंधित डेटा एकत्र किया जाएगा। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है, इसलिए इसमें पारदर्शिता, सामाजिक समावेश और जन-जागरूकता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि:

जनगणना में प्रवासी (पारदेशी) नागरिकों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए और उनका डेटा अलग से दर्ज किया जाए।

हर जिलेवार जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि आम नागरिक भी यह समझ सकें कि उनके क्षेत्र में जनगणना की प्रगति कितनी हुई है।

सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की जाए कि कुल जनगणना कितनी हुई, कितने लोगों के आधार कार्ड उपलब्ध हैं, और कितने लोग अभी भी सरकारी रिकॉर्ड से वंचित हैं।

सरकार एक आधिकारिक वेबसाइट पर “डेटा बुक” जारी करे, जिससे सभी आंकड़े एक ही स्थान पर उपलब्ध हों और भ्रम या अफवाह की कोई गुंजाइश न रहे।

Shaikh Abdul Samad ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनगणना के आंकड़ों का उपयोग नए जातीय या सामाजिक विवाद खड़े करने के लिए नहीं होना चाहिए। यह प्रक्रिया देश की योजनाओं, संसाधनों और विकास को सही दिशा देने के लिए है, न कि समाज को बांटने के लिए।

उन्होंने सरकार से अपील की कि जनगणना–2027 को विश्वसनीय, निष्पक्ष और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

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