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विश्व के समस्त टाइपिस्टों एवं टाइपिंग प्रेमियों को विश्व टाइपिंग दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

विश्व के समस्त टाइपिस्टों एवं टाइपिंग प्रेमियों को विश्व टाइपिंग दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

भगवान बुद्ध के धम्म, शांति, करुणा, अहिंसा और विश्व बौद्ध समुदाय की एकता का प्रतीक विश्व बौद्ध धम्म
ध्वज दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ ।

बुद्ध धम्म की क्या पहचान, मानव मानव एक समान ।

ब्रह्माण्ड के रहस्यों को खोलने वाले स्टीफन विलियम हॉकिंग जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।

पृथ्वी घूर्णन दिवस (Earth's Rotation Day) हर साल 8 जनवरी को मनाया जाता है, जो फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फूको (Léon Foucault) द्वारा 1851 में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के प्रदर्शन की वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसमें उन्होंने फूको पेंडुलम (Foucault Pendulum) का उपयोग किया था और यह दिन हमारे ग्रह के अपनी धुरी पर घूमने के वैज्ञानिक प्रमाण का जश्न मनाता है, जो दिन और रात का कारण बनता है।

अर्जुन के शंख (देवदत्त) और कल्कि भगवान के घोड़े (देवदत्त) के संबंध का एक ही दिव्य उद्देश्य: धर्म की पुनः स्थापना और अधर्म का नाश - के प्रतीक हैं, लेकिन अलग-अलग युगों में और अलग-अलग रूपों में प्रकट होते हैं।

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सेवानिवृत्त होने का अर्थ रोगग्रस्त गतिविधियों से मुक्त होकर स्वयं को स्वस्थ कार्यों में संलग्न करना है। वह कृष्णभक्ति है।

(श्रील प्रभुपाद,लॉस ऐन्जिलिस, 8 जनवरी 1969)
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जब तक आप भागवतम् और श्रीमद्भगवद्गीता का सत्संग में भक्तों के संग चर्चा ना करें, तब तक उसका पूर्ण आनंद नहीं मिलता है।

(श्रील प्रभुपाद,8 जनवरी 1977, मॉर्निंग वॉक, बम्बई)
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Bhagavad Gita Verse Of the Day:Chapter 11 Verse 33👇

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रुन्भुंक्ष्व राज्यं समृद्धम् |
मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भाव सव्यसाचिन् || ३३ ||

तस्मात् – अतएव; त्वम् –तुम; उत्तिष्ट – उठो; यशः – यश; लभस्व – प्राप्त करो; जित्वा – जीतकर; शत्रून् –शत्रुओं को; भुङ्क्ष्व – भोग करो; राज्यम् – राज्य का; समृद्धम् – सम्पन्न; मया –मेरे द्वारा; एव – निश्चय ही; एते – ये सब; निहताः – मारे गये; पूर्वम् एव – पहलेही; निमित्त-मात्रम् – केवल कारण मात्र; भव – बनो; सव्य-साचिन् – हे सव्यसाची |

Translation👇

अतः उठो! लड़ने के लिएतैयार होओ और यश अर्जित करो | अपने शत्रुओं को जीतकर सम्पन्न राज्य का भोग करो |ये सब मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं और हे सव्यसाची! तुम तो युद्ध मेंकेवल निमित्तमात्र हो सकते हो |

Commentary👇
सव्यसाची का अर्थ है वह जो युद्धभूमि में अत्यन्त कौशल के साथ तीर छोड़ सके | इस प्रकार अर्जुनको एक पटु योद्धा के रूप में सम्बोधित किया गया है, जो अपने शत्रुओं को तीर सेमारकर मौत के घाट उतार सकता है | निमित्तमात्रम् – “केवल कारण मात्र” यह शब्द भीअत्यन्त महत्त्वपूर्ण है | संसार भगवान् की इच्छानुसार गतिमान है | अल्पज्ञ पुरुषसोचते हैं कि प्रकृति बिना किसी योजना के गतिशील है और सारी सृष्टि आकस्मिक है |ऐसा अनेक तथाकथित विज्ञानी हैं, जो यह सुझाव रखते हैं कि सम्भवतया ऐसा था, या ऐसाहओ सकता है, किन्तु इस प्रकार के “शायद” या “हो सकता है” का प्रश्न ही नहीं उठता | प्रकृति द्वारा विशेष योजना संचालित की जा रही है | यह योजना क्या है? यह विराट जगत् बद्धजीवों के लिए भगवान् के धाम वापस जाने के लिए सुअवसर (सुयोग) है | जब तकउनकी प्रवृत्ति प्रकृति के ऊपर प्रभुत्व स्थापित करने की रहती है, तब तक वे बद्धरहते हैं | किन्तु जो कोई भी परमेश्र्वर की इस योजना (इच्छा) को समझ लेता है औरकृष्णभावनामृत का अनुशीलन करता है, वह परम बुद्धिमान है | दृश्यजगत की उत्पत्तितथा उसका संहार ईश्र्वर की परम अध्यक्षता में होता है | इस प्रकार कुरुक्षेत्र कायुद्ध ईश्र्वर की योजना के अनुसार लड़ा गया | अर्जुन युद्ध करने से मना कर रहा था,किन्तु उसे बताया गया कि परमेश्र्वर की इच्छानुसार उसे लड़ना होगा | तभी वह सुखीहोगा | यदि कोई कृष्णभावनामृत से पूरित हो और उसका जीवन भगवान् की दिव्य सेवा में अर्पित हो, तो समझो कि वह कृतार्थ है |

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