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आखिर 62 वर्षीय पत्रकार की सही बात को कब मानेगा खरगोन पुलिस प्रशासन ?

प्रिय मित्रो , आप देख रहे होंगे पिछले कुछ दिनों से मेरी फेसबुक वाल पर खरगोन की प्रकाश स्मृति संस्था के बारे में मैं लिख रहा हूं , मेरा उद्देश्य बेहद पवित्र है , अन्याय , अत्याचार और गलत कार्यों के विरोध में सोशल मीडिया के माध्यम से लिखकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना इसे मैं मेरा नैतिक कर्तव्य मानता हू , मित्रो शब्द ब्रह्म है और शब्द क्रांति ला सकता है इसका सबसे पहला अनुभव मेरा आज से 45 वर्ष पहले हुआ , जब मैं 14 वर्ष का था और कक्षा 9 वी में खरगोन की देवी अहिल्या हायर सेकेंडरी में पढ़ता था , स्कूल की फीस माफ के लिए पिताजी लगभग एक माह से तहसील के आफिस दौड़ रहे थे , आय का प्रमाण पत्र न बनने से स्कूल से फीस भरने का दबाव बढ़ रहा था , मुझे गुस्सा आया में सीधे तहसीलदार जी कक्ष में घुस गया और जोर जोर से बोलकर मेरे पिताजी के बारे में बताया की , आपके कार्यालय से मुझे आय का प्रमाण पत्र नही दिया जा रहा है , तहसीलदार जी ने मुझे शांत किया , बाबू को बुलाया और मेरा आय का प्रमाण पत्र तुरंत बन गया ....यह सबसे पहला शब्द शक्ति का अनुभव था मेरा ...आपने अपनी समस्या बताई तो आपका काम हो गया वरना आप एक माह से परेशान हो रहे थे ..इसके बाद सन 2002 में सरकारी अस्पताल के मेस सर्वेंट तांत्रिक आशुतोष वोरे की लड़ाई लड़ी , 2017 में मेरे पालीवाल समाज में दान की रसीद पर हाथ से नंबर , रुपए 6 लाख की राशि नगद और नंबर एक में अकाउंट से पेमेंट न देने का मामला मेने उठाया , इस मामले में मुझे निपटाने की बात व्हाट्सएप पर लिख दी , मेने उसका स्क्रीन शाट लेकर और पूरी चेटिंग की फोटोकापी करवाकर सबूत सेफ कर लिए , अब ये तीसरी लड़ाई प्रकाश स्मृति की है , इस लड़ाई में आज मेरे पास जिस व्यक्ति ने आकर जो शब्द बोले उन्हे सुनकर मैं आश्चर्य में पड़ गया , घबराया तो नही किंतु सोच में पड़ गया की गरीब , निर्धन , निराश्रित , जरूरतमंद की बात करने वाला इतना अधिक क्रूर हो सकता है , उस व्यक्ति ने मुझे कहा की मेने जब इनके खिलाफ मुहीम छेड़ी तो मुझे सड़क पर मारने की चेष्टा की किंतु मैं बच गया , उस व्यक्ति ने दावे से कहा की संतोष भाई इसका कुछ नही हो सकता क्युकी सारी राजनीति पार्टियां इसके साथ है , प्रशासन में सेटिंग कर लेता है , पत्रकारों से सेटिंग कर लेता है बहुत अधिक टेडे व्यक्ति के आगे झुकने , माफी मांगने में भी इसे कोई शर्म नही आती ! उन्होंने कहा प्रकाश स्मृति वाला मामला बहुत बड़ा है और इसकी सब जगह सेटिंग है , तुम्हारे आस पास , तुम्हारे मोबाइल पर भी इसके हितेषी जुड़े रहेंगे और उसे तुम्हारी सारी खबरे देते रहेंगे !
मित्रो , अभी तक श्री रवि महाजन के खिलाफ मेरी जो सोच थी वह काफी लचीली थी , उस व्यक्ति के मुख से सब बात सुनकर मैं दंग रह गया , उसने बताया अभी नगर पालिका के कसरावद चुनाव में एस डी एम ढोंके साब ने इसे मेंनगाव थाने पर सुबह से श्याम तक बैठा रखा , इसकी ड्यूटी लगी थी , मित्रो रवि महाजन उसके पिता श्री प्रकाश जी की अनुकम्पा पर सीधे यू डी टी पोस्ट पर काबिज हुआ , आज रवि जी की तनखा लगभग 90 हजार होगी जो 25 दिन का महीना लगाओ तो साढ़े तीन हजार रुपए प्रतिदिन गणित पढ़ाने के सरकार इन्हे दे रही है , शिकायत है आठ दिन में केवल एक दिन स्कूल जाते है रवि महाजन , यानी आज बेरोजगारी चरम सीमा पर है और सरकार स्कूल न आने वालो को भी साढ़े तीन हजार रुपया दे रही है , मजदूर सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करता है और उसे साढ़े तीन सौ रुपए मिलते है , जिस दिन वो काम नही करता उस दिन उन्हें पैसा नही मिलता जबकि सरकारी नोकरी वालो को तो उनका पैसा फिक्स है , कोरोना में सरकारी व्यक्ति को घर बैठे भी सारी तनखा मिली किंतु मजदूर , व्यापारी सब घाटे में रहे , कुल मिलाकर इस पोस्ट के माध्यम से जनता और प्रशासन को आगाह करने जा रहा हु की खरगोन शहर में अब यह स्थिति है यहां की राजनीति की ...उन महोदय की सारी बात सुनकर मैं निराश नही हुआ , मुझे याद आ गई रामचरित मानस के उस प्रसंग की ...जब भगवान राम को रावण को मारने के लिए एक साथ इकतीस बाण छोड़ने पड़े , अब खरगोन के इस प्रकरण में केवल मुझे श्री नरेंद्र जी मोदी जी से ही उम्मीद है क्युकी श्री रवि महाजन का ये जाल जो बिछा है उस रावण रूपी साम्राज्य को देश के प्रधानमंत्री राम बनकर एक साथ इकतीस छापे डलवाए तो ही रावण मर सकता है ! अब रही बात मेरी मौत की तो बंधुओ मैं आज 8 अक्तूबर सन 2022 शनिवार , हिंदी महीना आश्विन शुक्ल पक्ष चौदस तिथि को पूरे होशो हवास में लिख देता हू की यदि मेरी मृत्यु किसी दुर्घटना में होती है तो प्रकाश स्मृति के रवि महाजन , उनकी बेटी और बी जे पी नेता श्री रंजीत डंडीर पर शक करके उनसे पूछताछ अवश्य की जाय ! खरगोन से स्वतंत्र पत्रकार संतोष गुप्ता की स्वयं की कलम से !
*8 अक्टूबर 2000 की पोस्ट*
*संतोष न्यूज खरगोन*

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