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मोबाइल की लत से बच्चों का भविष्य खतरे में।

संवाददाता: योगेंद्र सिंह जादौन
सबलगढ़।
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन बच्चों की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, हर काम मोबाइल पर सिमट गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
कैसे खराब हो रहा है बच्चों का भविष्य
मोबाइल पर घंटों गेम खेलना, रील्स और वीडियो देखना बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर डाल रहा है। इससे एकाग्रता में कमी, याददाश्त कमजोर होना और समय की बर्बादी जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं।
डॉक्टरों के अनुसार अधिक मोबाइल उपयोग से आँखों में दर्द, नींद की कमी और मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। कई बच्चे चिड़चिड़े और आलसी होते जा रहे हैं।
सामाजिक और मानसिक प्रभाव
मोबाइल की वजह से बच्चे घर-परिवार और दोस्तों से दूर होते जा रहे हैं। उनमें बातचीत की आदत कम हो रही है और आत्मविश्वास भी घट रहा है। कुछ मामलों में मोबाइल की लत बच्चों को गलत कंटेंट की ओर भी ले जाती है।
बचाव के उपाय
विशेषज्ञों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के मोबाइल उपयोग पर समय सीमा तय करनी चाहिए।
माता-पिता बच्चों के साथ समय बिताएँ
खेलकूद और किताब पढ़ने की आदत डालें
पढ़ाई के लिए मोबाइल का सही और सीमित उपयोग सिखाएँ
स्कूलों में डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँ
निष्कर्ष
मोबाइल अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन उसका गलत और ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग बच्चों के भविष्य को नुकसान पहुँचा सकता है। सही मार्गदर्शन और नियंत्रण से ही बच्चों को मोबाइल की लत से बचाया जा सकता है।

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